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Fatty Liver: युवाओं में बढ़ रहा है नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर का खतरा, एक्सपर्ट से जानिए बचाव के तरीके

एसएमएस अस्पताल की ओपीडी में 25 से 30 फीसदी मरीज फैटी लिवर से ग्रस्त

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जयपुर. अव्यवस्थित लाइफ स्टाइल और असंतुलित खानपान लोगों को बीमार बना रहा है। खासकर युवा भी इसकी चपेट में है। उन्हें फैटी लिवर अपना शिकार बना रहा है। आश्चर्य है कि शराब का सेवन न करने वाले भी इसकी चपेट में आ रहे है।सवाईमान सिंह सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के गेस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि एक तिहाई शराब पीने वाले फैटी लिवर डिजीज से ग्रस्त हो सकते हैं, बाकी मोटापा, अव्यवस्थित लाइफस्टाइल, असंतुलित खानपान व डायबिटीज ,हार्ट, अधिक कॉलेस्ट्रोल के चलते फैटी लिवर होता है, जोकि आगे जाकर लिवर सिरोसिस जैसी दिक्कतें कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अस्पताल की ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों 25 से 30 फीसदी इसके ग्रसित है। इसमें 35 से 40 फीसदी तक युवा है।


समय पर काबू न होने यों बढ़ती है बीमारी, तीन स्टेज

1.साधारण फैटी लिवर(शुरूआत में लक्षण नहीं दिखते,कुछ लोगों के पेट के एक हिस्से में दर्द व भारीपन महसूस होता )

2. नॉन-अल्कोहिलक स्टेटोहेपेटाइटिस ( इस स्थिति में लिवर में सूजन आना शुरू हो जाती है)

3. लिवर सिरोसिस (इसमें लिवर सख्त और सिकुड़ने लगता और डेमेज हो जाता है)

यह बरते सावधानी

मोटापा कम करें, भोजन पर कंट्रोल करें।

कार्बोहाइड्रेट व वसा रहित, कम वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

एल्कोहॉल का सेवन न करें।

मांसाहारी भोजन न लें।

फिजिकल एक्टिविटी बढाएं।

खाने में फल, हरी सब्जियां व सलाद का सेवन करें।

स्वास्थ्य परीक्षण समय पर कराते रहे।

लक्षणों को अनदेखा न करें, तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।