
नई दिल्ली। इस साल चैत्र नवरात्र 18 मार्च से शुरू हो रहे हैं, जो कि 25 मार्च तक चलेंगे। इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पडने से नवरात्र आठ दिनों के होंगे। इसलिए अष्टमी के दिन हवन करने वाले यह कार्य 24 मार्च को करें। जबकि नवमी पर पूजन करने वाले 25 मार्च को करें। नवरात्र व्रत की शुरुआत प्रतिपदा से होगी। इस दिन शुभ मुहूर्त पर कलश स्थापना करें।
कलश स्थापना मुहूर्त
नवरात्र पर घरों में कलश स्थापित किया जाता है। यह नौ दिनों के लिए रखा जाता है। शास्त्रों में मिट्टी के कलश को स्थापना के लिए शुभ माना जाता है। इस बार चैत्र नवरात्र पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 35 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। कलश स्थापना प्रतिपदा तिथि पर देवी मां का आवाहन करते हुए करना चाहिए।
ऐसे करें पूजा
पूजन के लिए स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र धारण कर एवं हाथ जोडकर भगवान गणेश का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद मिट्टी के कलश हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा और रुपए रखना चाहिए। कलश में आम की पांच पत्तियों वाला एक छोटा—सा डंठल रखना चाहिए। इसके बाद उसमें रोली से स्वास्तिक का चिन्हृ बनाकर, गंगाजल छिडकना चाहिए। इसके बाद कलश की स्थापना करनी चाहिए। िफर कलश के चाारों ओर जौ डालकर मां अन्नपूर्णा का ध्यान करना चाहिए। अंत में मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर पर फूल, फल, वस्त्र, भोग आदि अर्पण कर देवी मां का ध्यान करना चाहिए। इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करना चाहिए। कई लोग नवरात्र के नौ दिन अखंड ज्योत भी जलाते हैं।
बन रहे हैं कई योग
नवरात्र का पर्व स्वत: एक शुभ दिन है। िफर भी इस दिन अन्य संयोग की वजह से यह दिन और भी खास हो गया है। इस बार चैत्र नवरात्र का पहला दिन रविवार होने से यह शुभ संकेत दे रहा है। चूंकि इस वर्ष का राजा सूर्य है और नवरात्र स्वामी ग्रह के दिन पड रहा है, इसलिए ये योग अत्यन्त फलदायक हो गया। इसके अलावा नवरात्र के पहले दिन ही सर्वार्था सिद्धि योग भी बन रहा है।
मुहूर्त के बिना भी कर सकते हैं कलश स्थापना
कई लोग कामकाज के चलते शुभ मुहूर्त पर कलश की स्थापना नहीं कर पाते। ऐसे में लोगों को चिन्ता करने की जरूरत नही है। वे नवरात्र के पहले दिन किसी भी समय कलश को स्थापित कर सकते हैं। इसमें कोई दोष नही लगता। इसकी पुष्टि धार्मिक ग्रंथ भी करते हैं। इन पौराणिक ग्रंथों के अनुसार नवरात्र का हर दिन शुभ होता है। हालांकि कलश की स्थापना कभी भी रात्रि को नहीं करना चाहिए।
किस दिन कौन—सी पूजा
18 मार्च पहला दिन (रविवार) : मां शैलपुत्री पूजा
19 मार्च दूसरा दिन (सोमवार) : मां ब्रह्मचारिणी पूजा
20 मार्च तीसरा दिन (मंगलवार) : मां चन्द्रघंटा पूजा
21 मार्च चौथा दिन (बुधवार) : मां कूष्मांडा पूजा
22 मार्च पांचवा दिन (गुरुवार) : मां स्कंदमाता पूजा
23 मार्च छठवा दिन (शुक्रवार) : मां कात्यायनी पूजा
24 मार्च सातवा दिन (शनिवार) : मां कालरात्रि पूजा
25 मार्च आठवा एवं नौवा दिन (रविवार) : मां महागौरी, मां सिद्धिदात्री
Published on:
16 Mar 2018 03:17 pm
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