12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

राजस्थान दिवस 2023 पर जानिए इतिहास, महत्व और खास बातें

30 मार्च 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर विशाल राजस्थान संघ का निर्माण किया गया। जानिए राजस्थान के गौरवशाली इतिहास, महत्व और अन्य खास बातें...

3 min read
Google source verification
राजस्थान दिवस 2023 पर जानिए इतिहास, महत्व और खास बातें

राजस्थान दिवस 2023 पर जानिए इतिहास, महत्व और खास बातें

जयपुर। आज राजस्थान दिवस है, रंग बिरंगी संस्कृति से भरी इस मरुभूमि में सभी को अपना बनाने की ताकत है। कोरोना के बाद विकट परिस्थिति में जब दुनिया भर में सांस्कृतिक विरासत को बचाने के प्रयास हो रहे थे तब राजस्थान ने नायक की भूमिका निभाते हुए संदेश दिया कि कोई भी वायरस, महामारी या अन्य संकट संस्कृति को तितर बितर नहीं कर सकता । आइए आपको बताते हैं कैसे राजस्थान का गठन हुआ और आधुनिकता के समावेश के साथ राजस्थान ने किस तरह अपने कदम बढ़ाए।


1949 से मनाया जाता है राजस्थान दिवस


राजस्थान दिवस प्रत्येक वर्ष 30 मार्च को मनाया जाता है। इस उपलक्ष में अल्बर्ट हॉल पर शाम 7 बजे समारोह का आयोजन किया गया है, जिसमें लोक कलाकार अपनी कला का प्रर्दशन करेंगे ।
30 मार्च 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर विशाल राजस्थान संघ का निर्माण किया गया। इसी दिन को राजस्थान के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह अपनी आन बान और शान के साथ परंपराओं के लिए भी लोकप्रिय है।


आर्थिक विषमता के बावजूद विकास की क्षमता


राजस्थान अपनी रंगीन संस्कृति , साहित्य, और हस्तशिल्प, साहस, कुर्बानी और त्याग के गौरवमयी इतिहास के लिए जाना जाता है। राजस्थान के लोग बलिदान, साहस और अपनी मेहनत के लिए पहचाने जाते है। भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक विषमता के बावजूद यहां के लोगो में राज्य का विकास करने की इच्छा शक्ति कायम है। राजस्थान में जातियों, धर्मों की अनेकता में एकता होने से समाज में लोग एक दूसरे की मदद के लिए तत्पर रहते है। गरीब लोगों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति में सुधार होना इसका एक उदाहरण है। सभी क्षेत्रों में विकास होना खुशहाली का प्रतीक बन गया है।

राजपूताना कहे जाने वाले राजस्थान का इतिहास गौरवमयी रहा है जहां कला संस्कृति और परम्पराओं पर सदैव गर्व किया जाता है। यहां के नागरिकों की वजह से परम्पराओं, संस्कृति की रक्षा बरकरार है। यह पर्यटन, व्यापार, खेल और खेती सभी क्षेत्रों में सबसे आगे हैं ।

30 मार्च 1949 को राजपूताने के गठन की प्रक्रिया के साथ ही एक नवम्बर 1956 को राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई। 30 मार्च को प्रदेशवासी राजस्थान दिवस के रूप में मनाते हैं और अतीत के साथ साथ अपने वर्तमान को याद करते हैं। इस अवधि में राजस्थान में हुई प्रगति, विकास और उल्लेखनीय उपलब्धियों का गुणगान करते हैं। राज्य सरकार कई प्रकार के आयोजन कर राजस्थान की वीरता, त्याग और विकास के परिदृश्य की प्रदेशवासियों को जानकारी देती है।


राजस्थान का लेखा - जोखा


राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है। राज्य का क्षेत्रफल 3.42 लाख किमी है। यह देश के कुल क्षेत्रफल का 10.41 प्रतिशत है। राजस्थान की जनसंख्या 6.85 करोड़ है और साक्षरता की दर 66.1 प्रतिशत है| राजस्थान रेतीला ,बंजर पर्वतीय और उपजाऊ कच्छारी मिट्टी से मिलकर बना है| वर्तमान में राजस्थान में सात सम्भाग 33 जिले 295 पंचायत समितियांए 9 हजार 894 ग्राम पंचायतें 43 हजार 264 आबाद गांव 184 शहरी निकाय और नगरीय क्षेत्र है| यहां विधान सभा की 200 और लोक सभा के 25 सीटें हैं| राज्य की अर्थ व्यवस्था कृषि और किसान पर निर्भर करती है । कृषि और पशु पालन यहां के निवासियों के मुख्य रोजगार हैं। आजादी के बाद इस प्रदेश ने दृढ़ता पूर्वक प्रगति व विकास कर ऊंचाईयों को छुआ है। वर्षा के कम होने से प्रदेश में अनेकों बार सूखे और अकाल जैसे हालात हुए है। लेकिन नागरिकों के हौसले और कड़ी मेहनत से प्रदेश को हर कठिन परिस्थिति से बाहर निकाला है।

राजस्थान में गठन के बाद आए अनेक बदलाव

इतिहास को देखें तो पहले रोजगार का अभाव ज्यादा और नागरिकों की स्तिथि दयनीय थी । लोगों ने बुद्धि कौशल से देश भर में उद्योग धंधे स्थापित किये और अपने लाखों प्रदेशवासियों को रोजगार उपलब्ध कराया। और हर क्षेत्र में प्रगति हासिल कीl स्कूल, काॅलेजों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ छात्रों का नामांकन भी दुगुना.चौगुना हुआ है राशन सस्ता होने के साथ विद्युत के क्षेत्र में भी हम आगे बढ़े हैं । विद्युत क्षमता में भी वृद्धि हुई है। गा्रमीण क्षेत्रों में घर.घर बिजली की रोशनी प्रज्वलित हुई है सड़कों का निर्माण भी हुआ।


बड़ी खबरें

View All

खास खबर

ट्रेंडिंग