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भारत के ऐसे कानून जो सीधे आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े हैं

क़ानून की जानकारी ही हमें परेशानी और कानूनी कारवाही से बचा सकती है। साथ ही हम अपने अधिकारों से भी परिचित होते हैं।

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जयपुर

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Mohmad Imran

Dec 23, 2020

भारत के ऐसे कानून जो सीधे आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े हैं

भारत के ऐसे कानून जो सीधे आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े हैं

भारत में संविधान ने आम नागरिकों को अधिकार तो बहुत दिए हैं लेकिन ज़्यादातर लोग इनके बारे में नहीं जानते। लेकिन हमें अपने मौलिक और रोज़मर्रा के कानूनों के बारे में तो अवश्य ही जान न चाहिए। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम शेयर कर रहे हैं कुछ ऐसे ज़रूरी क़ानून जो आपकी आम ज़िंदगी से जुड़े हैं। साथ ही कुछ ऐसे कानूनों की भी चर्चा करेंगे जाप पुराने हो चुके हैं लेकिन अब भी व्यवहार में मौजूद हैं। सुविधा के लिए हम एक एक कर दोनों प्रकार के कानूनों पर नज़र डालेंगे। इस श्रंखला में आज की प्रस्तुती।

महिला अधिकार
किसी संस्था के मालिक पर कब होगी एफआइआर
कार्यस्थल पर किसी महिला के साथ कोई गंभीर अपराध (जैसे रेप या यौन उत्पीडऩ या हिंसा) हो तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को देनी होती है। जानकारी होने के बाद भी अगर मालिक या प्रभारी द्वारा सूचना नहीं दी जाती तो उनके खिलाफ भी एफआइआर दर्ज होती है।
आइपीसी की धारा 376: इस धारा के तहत हुए अपराध गैर-जमानती होते हैं। ऐसा करने पर प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के सामने सुनवाई होती है। आरोप साबित होने पर 3 साल की कैद और जुर्माना अथवा दोनों किया जा सकता है।

अजब-ग़ज़ब कानून
133 साल पुराने इस कानून के अनुसार होटल सराय हैं
भारतीय संविधान में भारतीय सरिउस अधिनियम 1887 के अनुसार, देश के सभी होटल सराय हैं और वे आपको व पालतू पशुओं को मुफ्त में पानी पीने और वॉशरूम का उपयोग करने से नहीं रोक सकते। अगर वे ऐसा करते हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
रद्द हो सकता है लाइसेंस:
इस कानून के मुताबिक छोटे हों या फाइव स्टार होटल, ऐसा करने से मना नहीं कर सकते। अगर इनकार किया तो व्यक्ति की शिकायत पर लाइसेंस तक रद्द हो सकता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही एक मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस को बुजुर्ग दम्पती को सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि, मेंटिनेंस एंड वेल्फेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन एक्ट, 2007 के तहत बने उत्तर प्रदेश के सीनियर सिटिजन रूल्स-2014 के अनुसार, प्रशासन और जिला मजिस्ट्रेट का उत्तरदायित्व है कि वे जिले के वरिष्ठ नागरिकों की रक्षा करंे।
क्या है मामला
यह मामला, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कृष्णपाल सिंह और उनकी पत्नी (याचिकाकर्ता) का था। दम्पती ने आरोप लगाया कि उनकी विवाहित बेटियां एवं दोनों दामाद घर व सम्पत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं। रोज के हस्तक्षेप से सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने अपनी और संपत्ति की सुरक्षा के लिए लखनऊ कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोई कार्रवाई नहीं होने पर हाइकोर्ट गए। तब हाइकोर्ट ने सीनियर सिटिजन एक्ट के तहत उन्हें सुरक्षा देने का आदेश दिया है।