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तेलंगाना सहित 10 राज्य सर्वाधिक रहे साइबर हमलावरों के निशाने पर

गुजरात और मध्यप्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां नए आइटी/आइटीइएस केंद्रों के बढ़ने से इन खतरों की जांच में इजाफा हुआ है। हमलों का पता लगाने में हुई वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि पिछले साल से सबक लेते हुए भारत ने 2023 में अपने साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया है।
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जयपुर

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Kiran Kaur

Dec 25, 2023

तेलंगाना सहित 10 राज्य सर्वाधिक रहे साइबर हमलावरों के निशाने पर

तेलंगाना सहित 10 राज्य सर्वाधिक रहे साइबर हमलावरों के निशाने पर

नई दिल्ली। दुनियाभर में इस साल महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर साइबर हमलों में वृद्धि हुई है। सशस्त्र संघर्षांे के डिजिटल क्षेत्र में विस्तार ने भी खतरों को बढ़ाया है। 'इंडिया साइबर थ्रेट रिपोर्ट 2023' के अनुसार भारत में इस साल मैलवेयर अटैक के मामले जिन 10 राज्यों में सर्वाधिक डिटेक्ट हुए उनमें तेलंगाना, तमिलनाडु और दिल्ली शीर्ष पर हैं। गुजरात और मध्यप्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां नए आइटी/आइटीइएस केंद्रों के बढ़ने से इन खतरों की जांच में इजाफा हुआ है। हमलों का पता लगाने में हुई वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि पिछले साल से सबक लेते हुए भारत ने 2023 में अपने साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया है।

स्मार्टफोन पर औसतन हर माह हो रहे तीन अटैक:

मैलवेयर ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जिसे जानबूझकर मोबाइल या कम्प्यूटर को नुकसान पहुंचाने के लिए डिजाइन किया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि एंड्रॉइड स्मार्टफोन पर हर महीने औसतन तीन हमले हो रहे हैं, जिनमें से 39 प्रतिशत मैलवेयर होते हैं। इतना ही नहीं ईमेल और वेबसाइटों में दुर्भावनापूर्ण लिंक पर क्लिक करने के परिणामस्वरूप 25 फीसदी साइबर हमले होते हैं। वहीं भारत विशेषतौर पर सरकारी एजेंसियों को निशाना बनाने वाले तत्वों के प्रति बेहद संवेदनशील देशों में से एक है।

हमलों का कम अनुपात प्रभावी डिटेक्शन का संकेत:

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग 2023 में साइबर हमलों के प्राथमिक लक्ष्य के रूप में उभरा, इसके बाद सरकारी बुनियादी ढांचा और शिक्षा क्षेत्र थे। रिपोर्ट के अनुसार 650 डिटेक्शन पर रैनसमवेयर की एक घटना सामने आई। जबकि मैलवेयर के मामले में यह आंकड़ा 38,000 डिटेक्शन पर एक रहा। हमलों का कम अनुपात प्रभावी डिटेक्शन तंत्र का संकेत देता है। इस साल सबसे ज्यादा फरवरी में मैलवेयर अटैक की घटनाएं सामने आईं, इसके बाद अगस्त में इनमें उछाल देखा गया। जबकि रैनसमवेयर के मामले जनवरी और फरवरी में सर्वाधिक दर्ज किए गए।

इंस्टेंट फाइनेंस का दौर दे रहा बड़ी चिंताएं:

इंस्टेंट फाइनेंस के इस दौर में ऐसे ऐप्स में बढ़ोतरी हुई है, जो अधिक कागजी कार्रवाई की आवश्यकता के बिना छोटे ऋण प्रदान करते हैं। इस सुविधा के पीछे कई चिंताएं भी छिपी हैं। पिछले 2-3 सालों में देश में ऐसी मौतें बढ़ी हैं जिसमें यूजर्स को ऋण के बदले दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग का सामना करना पड़ा था। ये ऐप्स ऋण के बदले में भारी ब्याज दर वसूलते हैं और अक्सर विकृत तस्वीरों, साइबर बुलिंग के जरिए जबरन वसूली का भी सहारा लेते हैं। इन्हीं खतरों को देखते हुए गूगल ने भी अपने प्ले स्टोर से ऐसी लगभग 3500 ऐप्स को हटाया है।

मैलवेयर डिटेक्शन वाले शीर्ष 10 राज्य
तेलंगाना- 15%
तमिलनाडु- 14%
दिल्ली-11%
गुजरात-11%
कर्नाटक-10%
महाराष्ट्र-09%
हरियाणा-08%
पश्चिम बंगाल -08%
उत्तर प्रदेश- 07%
मध्य प्रदेश- 07%