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जयपुर मेट्रो का होगा बड़ा विस्तार! चाकसू, चौमूं, बस्सी सहित कई नए रूटों पर मेट्रो चलाने की तैयारी

Jaipur Metro Phase 3: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 4 जून को जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण का शिलान्यास किए जाने के बाद राजधानी जयपुर में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की कवायद तेज हो गई है।
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Jaipur Metro Update

जयपुर मेट्रो। फोटो: पत्रिका

Jaipur Metro Expansion: जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 4 जून को जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण का शिलान्यास किए जाने के बाद राजधानी जयपुर में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की कवायद तेज हो गई है। राजस्थान सरकार ने जयपुर मेट्रो के तीसरे चरण और भविष्य के नए कॉरिडोर की योजना पर काम शुरू दिया है है। मेट्रो प्रशासन ने संभावित रूटों की फिजिबिलिटी जांचने के लिए एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी है, जो रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर जयपुर मेट्रो के नए रूट तय किए जाएंगे।

शुरुआती योजना में वैशाली नगर, जगतपुरा, मालवीय नगर और रामगढ़ मोड जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने पर जोर है। साथ ही चाकसू, बस्सी, चौमूं, बगरू, फागी और चंदवाजी तक मेट्रो लाइट चलाने की संभावना तलाशी जा रही है। जयपुर शहर के बाहरी क्षेत्रों को जोड़ने के लिए मेट्रो लाइट मॉडल पर काम किया जा रहा है। इसके तहत बस्सी को ट्रांसपोर्ट नगर, चाकसू को सीतापुरा, चौमूं को डोटी, फागी को सांगानेर व बगरू 200 फीट चौराहे से जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में मेट्रो संचालन बस्सी तक करने की घोषणा थी। इसके लिए डीपीआर तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई थी। अब भजनलाल सरकार जयपुर शहर की सीमाओं से लगे उपनगरीय क्षेत्रों जैसे चाकसू, बस्सी, चौमूं, बगरू, फागी और चंदवाजी तक कम यात्री क्षमता वाले फीडर कॉरिडोर के लिए मेट्रो लाइट मॉडल पर मंथन कर रही है।

मेट्रो फेज-2 के लिए टेस्ट पाइलिंग शुरू

इधर, जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना के तहत निर्माण की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाते हुए प्रहलादपुरा में रिंग रोड के पास टेस्ट पाइलिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह प्रक्रिया मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर की नींव की मजबूती और जमीन की भार वहन क्षमता का परीक्षण करने के लिए की जा रही है। शुक्रवार को टेस्ट पाइलिंग के दौरान मेट्रो के आला अधिकारी मौजूद रहे।

टेस्ट पाइलिंग के दौरान निर्धारित स्थानों पर पाइल डालकर उन पर लोड टेस्ट किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि जमीन मेट्रो के पिलरों का भार सुरक्षित रूप से वहन कर सकती है या नहीं। परीक्षण के परिणामों के आधार पर पाइल की गहराई, व्यास और डिजाइन को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित स्थानों पर स्थायी पाइलिंग और पिलर निर्माण का कार्य शुरू होगा। इसके साथ ही यूटिलिटी शिफ्टिंग और अन्य सिविल कार्यों में भी तेजी आएगी।