मात्र 8 वर्ष की उम्र में ही क्रिश्चियन मिशनरीज की कहानियों से प्रभावित हो मदर टेरेसा ने 12 वर्ष की उम्र में अपने आपको जीसस को समर्पित कर दिया था। 18 वर्ष की उम्र में एक यात्रा के दौरान उन्हें आध्यात्मिक अनुभव हुआ जिसके बाद सेवा का प्रण लेकर भारत के कलकत्ता (वर्तमान में कोलकाता) शहर में चली आई। यहां उन्होंने सड़क के किनारे पड़े लाचार, बीमार और असहाय लोगों के लिए सेवा का कार्य शुरू किया।