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अहम की जंग में पिसे यात्री : बस स्टैंड बना ‘तंदूर’, बिजली गुल और पंखे बंद से हाल बेहाल

पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे में बस स्टैंड पर लगे पंखे बंद होने से प्रतीक्षालय में बैठना भी मुश्किल हो गया है। यात्री पसीने से तर-बतर होकर बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं।

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सादुलपुर. भीषण गर्मी, उमस भरा मौसम और सिर पर तपता सूरज… ऐसे हालात में बस स्टैंड पर इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए राहत की कोई व्यवस्था नहीं है। पंखे बंद हैं, बिजली गुल है और चारों ओर पसरी अव्यवस्था। नगरपालिका और राजस्थान रोडवेज (Rajasthan Roadways) के बीच चल रहे मालिकाना हक के विवाद ने इस सार्वजनिक स्थल को बदहाली का प्रतीक बना दिया है। हजारों यात्री रोज यहां से गुजरते हैं, लेकिन उनकी परेशानी सुनने वाला कोई नहीं।

अहम की लड़ाई में पिस रहे लोग

बस स्टैंड के स्वामित्व को लेकर नगरपालिका और रोडवेज के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। दोनों ही विभाग इसे अपनी संपत्ति बता रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं। इसी खींचतान के चलते बिजली बिल का भुगतान नहीं हुआ और विद्युत निगम ने कुछ दिन पहले कनेक्शन काट दिया। परिणाम—पूरे परिसर में अंधेरा और उमस।

पंखे बंद, इंतजार बना सजा

पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे में बस स्टैंड पर लगे पंखे बंद होने से प्रतीक्षालय में बैठना भी मुश्किल हो गया है। यात्री पसीने से तर-बतर होकर बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए स्थिति और भी अधिक दयनीय है। बिजली कटौती का असर बस स्टैंड पर संचालित दुकानों पर भी साफ नजर आ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि गर्मी और अंधेरे के कारण यात्री ज्यादा देर रुकना नहीं चाहते, जिससे उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है। बिना बिजली के काम करना भी उनके लिए चुनौती बन गया है।

कागजों में विकास, जमीन पर बदहाली

बस स्टैंड पर सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है। चारों ओर गंदगी पसरी है, जिससे यात्रियों को प्रदूषणयुक्त माहौल में रहना पड़ रहा है। शौचालय की व्यवस्था ठेके पर होने के बावजूद यात्रियों से शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन साफ-सफाई का अभाव साफ नजर आता है। इससे लोगों में आक्रोश है। लाखों रुपए के विकास कार्यों के दावों के बावजूद बस स्टैंड की वास्तविक स्थिति बेहद खराब है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास केवल कागजों में नजर आता है, जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हो रहा। जिम्मेदार अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

कब जागेगा जिम्मेदार तंत्र?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक आमजन इस अव्यवस्था का सामना करता रहेगा? क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे या फिर बस स्टैंड यूं ही बदहाली का शिकार बना रहेगा? इस संबंध में अधिशासी अधिकारी भरत हरतिवाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन अवकाश होने के कारण बात नहीं हो सकी। अब आमजन को उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनकर जिम्मेदार विभाग जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएंगे।

इनका कहना है

बस स्टैंड के नाम से कोई विद्युत कनेक्शन था ही नहीं किसी जल सेवा केंद्र के नाम से वर्षों पुराना विद्युत कनेक्शन था बगैर राशि होने के कारण विद्युत कनेक्शन काट दिया गया है। कमल कुमार, कनिष्ठ अभियंता, विद्युत निगम सादुलपुर