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मरीजों की बढ़ी परेशानी, सेल्फ मेडिकेशन बन रहा सटीक उपचार में बाधा

कई एंटीबॉयोटिक दवाएं हो रही बेअसर कल्चर जांच नहीं होने से उपचार होता है प्रभावित बीमारी का कारण और सटीक उपचार जाने बिना अक्सर ली जाने वाली दवाओं ( दवा प्रतिरोधक क्षमता ) के कारण कई एंटी बायोटिक दवाएं बेअसर हो रही है। जिससे साधारण बीमारी होने पर मरीजों का समय पर उपचार नहीं हो […]

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कई एंटीबॉयोटिक दवाएं हो रही बेअसर

कल्चर जांच नहीं होने से उपचार होता है प्रभावित

बीमारी का कारण और सटीक उपचार जाने बिना अक्सर ली जाने वाली दवाओं ( दवा प्रतिरोधक क्षमता ) के कारण कई एंटी बायोटिक दवाएं बेअसर हो रही है। जिससे साधारण बीमारी होने पर मरीजों का समय पर उपचार नहीं हो रहा है। यह खुलासा अस्पतालों के मेडिसिन ओपीडी में आने वाले कई मरीजों की जांच में सामने आया है। चिंताजनक बात है कि एंटीबॉयोटिक की प्रतिरोधकता प्रत्येक आयुवर्ग में हो रही है। चिकित्सकों के अनुसार लबे समय तक बिना चिकित्सक की सलाह के एंटीबॉयोटिक व दर्द निवारक दवाएं लेने के कारण ओपीडी में आने वाले पच्चीस फीसदी से ज्यादा मरीजों में दवाओं के कई सॉल्ट के प्रतिरोधकता क्षमता बन जाती है। जबकि जिस बीमारी के कारण वे ये दवाएं ले रहे हैं उस बीमारी में इस प्रकार की दवाएं लेने की जरूरत ही नहीं होती है। रही सही कसर एंटीबॉयोटिक व दर्द निवारक दवाओं का तय दिनों तक कोर्स नहीं लेने के कारण हो जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को होती है जो पूर्व में ले चुके एंटीबॉयोटिक का नाम या साल्ट चिकित्सक को नहीं बता पाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का मनमर्जी से उपयोग नहीं रुका तो प्रतिरोधक क्षमता इतनी बढ़ जाएगी कि मरीज की साधरण चोट और जुखाम का इलाज भी बेहद मुश्किल हो जाएगा।

यह है कारण

चिकित्सकों के अनुसार लोग बिना चिकित्सक को दिखाए दवा ले लेते हैं और थोड़ा सा सुधार होते ही दवा लेना बंद कर देते हैं। शरीर में दवा प्रतिरोधी संक्रमण होने से कुछ रोगियों के इलाज के लिए बहुत अधिक विकल्प नहीं बचते हैं। बैक्टीरिया समय के साथ बदलते हैं और कई दवाओं के लिए प्रतिरोधी बन जाते हैं जो उन्हें हराने और उनके कारण होने वाले संक्रमण को ठीक करने में कारगर होती हैं। जिससे गंभीर मरीज का लबे समय तक उपचार चलता है। जबकि 80 के दशक तक कई एंटीबॉयोटिक दवाएं पूरी तरह असरदार थीं लेकिन अब आधे से ज्यादा मरीजों के लिए ये किसी काम की नहीं रही।

यों समझें परेशानी

एंटीसेप्टिक व एंटीबायोटिक्स दवाइयों को एक नियमित तरी़के से लेना होना बेहद जरूरी है। कई दवाइयों के साथ ख़ास तरह का भोजन वर्जित होता है। बिना चिकित्सक की सलाह के लंबे समय दवा लेते रहने से गुर्दे तक खऱाब होने का ख़तरा होता है। बाजार में कई तरह की एंटीबॉयोटिक आती है। कई दवा में दो से तीन सॉल्ट का मिश्रण होता है। ऐसे में बिना चिकित्सक के सलाह के अलग-अलग विपरीत मिश्रण वाली दवाएं लेने से मरीज की जान पर भी बन आती है। इसके अलावा दवा की दो खुराक के बीच निश्चित समय अंतराल होता है। ऐसें में तय समय से पहले दवा लेने से शरीर में दवा की मात्रा बढ़ जाती है और उससे शरीर को नुकसान झेलना पड़ता है।

इनका कहना है

बीमारी का कारण कुछ और हो सकता है। चिकित्सक के परामर्श के बाद ही दवाएं लें। किसी दवा से एलर्जी हो तो पूरे लक्षण चिकित्सक को बताएं जिससे सही तरीके से समय पर इलाज हो किया जा सके।

डॉ. मनोज बुढानिया, आर्थो स्कोपिक सर्जन कल्याण अस्पताल