19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कविता-कैसे बनेगी बात भला

Hindi Poem

less than 1 minute read
Google source verification
कविता-कैसे बनेगी बात भला

कविता-कैसे बनेगी बात भला

नीतू बापना

बातों बातों में बिगाड़ा जो सारी बातों को,
अब बनाओगे तो कैसे बनेगी बात भला,
भरी महफिल में आजमा लिया था हाथों को,
अब मिलाओगे तो कैसे मिलेंगे हाथ भला,

हर जुबां पर तुम्हारे नाम के ही चर्चे हैं,
हर गली में तुम्हारे काम की ही चर्चे हैं
जीत हर दिल को जो, पाई बड़ी हुकूमत है,
दिल जो तोड़ोगे तो कैसे करोगे राज भला,

एक निवाला भी साथ बैठकर जो खाते हैं,
जो दिवाली व ईद साथ में मनाते हैं,
छोटी बातों में जो हथियार उठा कर बैठे ,
कैसे कर पाओगे फिर आरती नमाज भला,

कोई सागर कहीं मिश्री का गुला है ही नहीं,
कोई इंसान यहां दूध धूला है ही नहीं,
जो गुनाहों की दवा साथ लिए फिरते हो ,
फिर बीमारी से कैसे पाओगे निजात भला।

जुडि़ए पत्रिका के 'परिवार' फेसबुक ग्रुप से। यहां न केवल आपकी समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि यहां फैमिली से जुड़ी कई गतिविधियांं भी देखने-सुनने को मिलेंगी। यहां अपनी रचनाएं (कहानी, कविता, लघुकथा, बोधकथा, प्रेरक प्रसंग, व्यंग्य, ब्लॉग आदि भी) शेयर कर सकेंगे। इनमें चयनित पठनीय सामग्री को अखबार में प्रकाशित किया जाएगा। तो अभी जॉइन करें 'परिवार' का फेसबुक ग्रुप। join और Create Post में जाकर अपनी रचनाएं और सुझाव भेजें। patrika.com