
कविता-कैसे बनेगी बात भला
नीतू बापना
बातों बातों में बिगाड़ा जो सारी बातों को,
अब बनाओगे तो कैसे बनेगी बात भला,
भरी महफिल में आजमा लिया था हाथों को,
अब मिलाओगे तो कैसे मिलेंगे हाथ भला,
हर जुबां पर तुम्हारे नाम के ही चर्चे हैं,
हर गली में तुम्हारे काम की ही चर्चे हैं
जीत हर दिल को जो, पाई बड़ी हुकूमत है,
दिल जो तोड़ोगे तो कैसे करोगे राज भला,
एक निवाला भी साथ बैठकर जो खाते हैं,
जो दिवाली व ईद साथ में मनाते हैं,
छोटी बातों में जो हथियार उठा कर बैठे ,
कैसे कर पाओगे फिर आरती नमाज भला,
कोई सागर कहीं मिश्री का गुला है ही नहीं,
कोई इंसान यहां दूध धूला है ही नहीं,
जो गुनाहों की दवा साथ लिए फिरते हो ,
फिर बीमारी से कैसे पाओगे निजात भला।
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Updated on:
27 Nov 2021 03:45 pm
Published on:
27 Nov 2021 03:03 pm
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