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पंडित नेहरू की अध्यक्षता में हुए उदयपुर सम्मेलन में भूपाल सिंह का योगदान

राजस्थान दिवस पर विशेष

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डॉ. जी.एल. मेनारिया

1946 ई. में पं. जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में उदयपुर में उस समय महाराणा भूपाल सिंह के शासन में भारतीय रियासतों का प्रजा सम्मेलन का आठवाँ अधिवेशन सम्पन्न हुआ। यह पहला अधिवेशन था जो किसी रियासत में हुआ था इसमें महाराणा मेवाड़ ने देश की स्वतन्त्रता और संवैधानिक प्रजातान्त्रिक और लोकतान्त्रिक उत्तरदायी सरकार के बनाने के साथ-साथ देशी रियासतों के राष्ट्रीय एकता के महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। 5 जून 1947 के शुभ अवसर पर जिस दिन महाराणा प्रताप की 407 वीं जयन्ती थी, महाराणा भूपाल सिंह राष्ट्र की अखण्डता और अपने पूर्वजों हिन्दूआ सूर्य वंशज महाराणा प्रताप के शाश्वत् गौरव की स्मृति में मेवाड़ में प्रथम संविधान लागू किया जो लोककल्याणकारी, शासन व्यवस्था और जनता की आजादी से सम्बन्धित था। राष्ट्रीय एकीकरण एवं अखण्ड भारत की स्वाधीनता के स्वप्नदृष्टा भूपाल सिंह ने सभी देसी रियासतों के शासकों और निवासियों को जो भाषण दिया उसका सार इस प्रकार है -

हम समस्त राजपूत कुल के शासक परस्पर एक ही वंश से गूथें हुए हैं, जो इस देश के निवासियों की परम्पराओं भाषा संस्थाओं की एकरूपता का परिणाम है। आधुनिक काल में भारत ने अपनी स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया, जिसमें हमें सफलताएं मिली परन्तु ज्वलंत समस्या इस वक्त यह है कि देश की अखण्डता एवं राष्ट्रीय एकता को कैसे संरक्षित व सुदृढ़ किया जाए। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। मैं देश के समस्त राजकुल परिवारों, सामन्तों एवं शासन से जुड़े लोगों से अपील करता हूँ कि दिल्ली में एक मजबूत व स्थायी केन्द्रीय सरकार बनी रहे, अभी तक जिन राजा, नवाबों ने भारत संघ में मिलने की अभी तक स्वीकृति नहीं दी है। मैं उनसे भी अनुरोध करता हूँ कि वे भारत संघ के लिए बनायी गयी विधायिका में सम्मिलित होकर राष्ट्रीय एकीकरण के लिए संघर्षरत्त जननायकों को सम्बल देंवे। यदि भारत जीवित व अस्तित्व में रहता है तो ही हमारा अस्तित्व रहेगा। हम संगठित रहते हैं तो मजबूत राष्ट्र बना सकेंगे। यदि पृथक-पृथक रहेंगे तो हमारा अस्तित्व संकट में होगा। यदि भारत विश्व शक्ति के रूप में अस्तित्व में जीता रहता है, तो हम सभी जीवित रहेंगे। यदि भारत असफल रहता तो हमारी मृत्यु निश्चित है।

मेवाड़ के क्षत्रिय राजपूत कुलीन असंख्य नर-नारियों तथा अन्य जातियों के लोगों ने राष्ट्र की अस्मिता, गौरव, गरिमा के लिए त्याग बलिदान दिया है जिसका इतिहास सदैव हमें अपनी मातृभूमि की सुरक्षा के लिए प्रेरित करता है। अतः हमने मेवाड़ की जनता को शासन में विधिक स्वतन्त्रता देने हेतु संवैधानिक प्रशासनिक व्यवस्था हेतु कानून का राज्य स्थापित करने के लिए इस संविधान को लागू किया है। मेवाड़ का यह नया संविधान उत्तरदायी सरकार के सिद्धान्तों अनुसार बनाया व लागू कर दिया है। जिसमें न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं व्यवस्थापिका के तीनों ही अंग स्वतन्त्र रहेंगे। इनमें शक्ति संतुलन बनाये रखने के प्रजातांत्रिक अंकुश का प्रावधान रखा गया है।

(लेखक इतिहासकार है और ये उनके राजस्थान दिवस पर लिखे विचार है)

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