18 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan Roadways: हर महीने ₹90 करोड़ का नुकसान, सरकार पर बढ़ा बोझ; 3400 में से 1300 बसें निजी हाथों में

Roadways Big Update: राजस्थान में परिवहन की ‘लाइफ लाइन’ कही जाने वाली राजस्थान रोडवेज बढ़ते निजीकरण और लगातार घाटे के कारण सुर्खियों में है।

2 min read
Google source verification

कोटा

image

Anil Prajapat

image

शैलेन्द्र तिवारी

Apr 18, 2026

Rajasthan Roadways-3

राजस्थान रोडवेज। फोटो: पत्रिका

Rajasthan Roadways Crisis: कोटा। राजस्थान में परिवहन की ‘लाइफ लाइन’ कही जाने वाली राजस्थान रोडवेज बढ़ते निजीकरण और लगातार घाटे के कारण सुर्खियों में है। कभी महज 5 प्रतिशत तक सीमित निजी बसों की हिस्सेदारी अब बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वर्तमान में रोडवेज के करीब 3400 बसों के बेड़े में 1300 बसें निजी अनुबंध पर संचालित हो रही हैं। जिससे निगम की नीतियों और आर्थिक प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि रोडवेज प्रबंधन का दावा है कि राजस्व बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन घाटा कम करने के ठोस कदम धरातल पर नजर नहीं आ रहे। आर्थिक तंगी से जूझ रहे निगम ने नई बसें खरीदने के बजाय निजी बसों को अनुबंध पर लेना अधिक आसान समझा। इसके चलते निजी ऑपरेटरों पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। कर्मचारियों में इस स्थिति को लेकर असंतोष है और उन्हें भविष्य में पूर्ण निजीकरण का खतरा दिख रहा है।

आय से ज्यादा खर्च

रोडवेज को हर माह भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। निगम का मासिक राजस्व लगभग 150 करोड़ रुपए है, जबकि खर्च बढ़कर करीब 240 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यानी हर माह लगभग 90 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। इस घाटे की भरपाई के लिए राज्य सरकार को हर साल 1000 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान देना पड़ रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त भार बढ़ रहा है।

4500 परिचालक, 2600 से करवा रहे लिपिकीय कार्य

स्थिति यह है कि रोडवेज के पास स्वयं के करीब 4500 परिचालक हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 1900 परिचालक ही बसों में कार्यरत हैं। शेष लगभग 2600 परिचालकों से बस स्टैंडों पर लिपिकीय कार्य, बुकिंग काउंटर और अन्य कार्यालयी काम लिए जा रहे हैं। इसी तरह 4439 चालक उपलब्ध हैं, इसके बावजूद करीब 800 चालकों को अनुबंध पर रखा गया है।

प्रदेश में कब कितनी खरीदी गई बसें

वर्षखरीदी गई बसें
2012411 ब्लू लाइन, 94 स्टार लाइन, 36 स्लीपर
2013789 ब्लू लाइन, 10 स्लीपर, 10 एसी स्लीपर, 368 मिनी
2014100 ब्लू लाइन, 133 मिनी
201510 सुपर लग्जरी
2016283 ब्लू लाइन, 5 लग्जरी
20172015 ब्लू लाइन, 12 लग्जरी
2018कोई बस नहीं खरीदी गई
2019875 ब्लू लाइन
2020–2024कोई बस नहीं खरीदी गई
2025500 बसें प्रस्तावित / खरीद प्रक्रिया में

इनका कहना है

यात्रियों को राजस्थान रोडवेज में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि रोडवेज केवल अनुबंधित बसों पर ही निर्भर है, राज्य सरकार ने नई बसों की खरीद की है। इसके साथ ही चालक और परिचालकों की भर्ती भी की गई है।
-पुरुषोत्तम शर्मा, एमडी, राजस्थान रोडवेज