
नई दिल्ली: चीन और पाकिस्तान के साथ चल रही तनातानी के बीच भारत के लिए अपनी सामरिक शक्ति को मजबूत करना न सिर्फ आज की जरूरत बन गई है बल्कि वैश्विक शक्ति के तौर पर अपने को स्थापित करना भी जरूरी हो गया है। इसी को देखते हुए भारत ने हाल के दिनों में कई बड़े रक्षा सौदे किए हैं। अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने के लिए भारत ने रूस से टी-90 भीष्म टैंक का सौदा किया। टी 90 टैंक भारत के लिए आन बान शान है। इस बार भी गणतंत्र दिवस के मौके पर थल सेना का T 90 भीष्म टैंक मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा। आइए जानते हैं इसकी खासियत
T 90 भीष्म टैंक
भारत ने रूस से 2001 में टी-90 भीष्म टैंक को खरीदा था। भारत ने रूस से 310 टैंक खरीदा। जिसमें से 120 टैंक बने बनाए मिले और 90 सेमी–असेंबल मिले थे। इसके अलावा अन्य 100 टैंकों को भारत में तैयार किया गया। 2011 में भारत ने फिर रूस से करीब 10 हजार करोड़ रुपए की डील के तहत 354 नए टैंक खरीदे। T 90 भीष्म टैंक को रूस ने 1993 में अपनी सेवा में लिया था। इस टैंक में 125 मिमी स्मूथबोर गन लगी हुई है जो इसे ताकतवर बनाती है। भीष्म टैंक एंटी टैंक मिसाइल भी छोड़ने में सक्षम है। यह टैंक 100 मीटर से लेकर 4 किलोमीटर की दूरी तक विरोधी टैंक को अपना निशाना बना सकता है।
टैंक खरीदने का मकसद
इस खरीददारी का मकसद भारत–चीन और पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा है।भारत अरबों रुपए खर्च कर अपनी सीमा को सुरक्षित रखना चाहता है। इसी कड़ी में भारत ने रूस से 2001 में 310 T-90 भीष्ण टैंक खरीदा था। जिसमें से 120 टैंक बने थे और 90 सेमी–असेंबल थे। इसके अलावा अन्य 100 टैंकों को भारत में तैयार किया गया। 2011 में भारत ने फिर रूस से करीब 10 हजार करोड़ रुपए की डील के तहत 354 नए टैंक खरीदे। उसके बाद मोदी सरकार आने के बाद सितंबर 2016 में 464 टैंक की खरीददारी को मंजूरी मिली। डील में आंकड़ों के हिसाब से एक टैंक की कीमत लगभग 30 करोड़ रुपए हैं।
T-90 भीष्म टैंक का जलवा
भारतीय सैन्य की ताकत पिछले साल राजपथ पर गणतंत्र दिवस के मौके पर दिखी थी। जब T-90 भीष्म टैंक को भारत की आन बान शान के रूप में उतारा गया था। इससे पहले रूस में आयोजित इंटरनेशनल आर्मी गेम्स में T-90 भीष्म टैंक ने अपनी ताकत का जौहर दिखाते हुए चीन को हैरान कर दिया था। इस टैंक ने हवा में छलांग लगाकर ब्रिज की लेयर को बिना छूए पार किया था। जबकि चीन का टैंक लड़खड़ा गया था। चीनी टैंक के पहिया समेत कई हिस्से अलग-अलग हो गए। भारत के इस टैंक को जहाज से रूस भेजा गया था। टैंक के बेहतर प्रदर्शन के बाद भारतीय सेना टॉप-4 में शामिल हो गई।
Published on:
25 Jan 2018 05:47 pm
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