
सत्यप्रेम की कथा मूवी रिव्यू
फिल्म की कहानी में दम हो तो उसे सफल होने से और लोगों की नजरों में चढऩे से कोई नहीं रोक सकता। करण श्रीकांत ने एक फ्रेश सी कहानी लिखी, जिसमें एक मैसेज के साथ एक ऐसे मुद्दे को उठाया गया है, जो तकरीबन गौण ही है। सत्यप्रेम की कथा में डेट रेप के मुद्दे को उठाया गया। हालांकि, मुद्दा कहानी में इस तरह गूंथा गया है कि रोमांटिक -कॉमेडी का जोनर भी न बिगड़े और जो मैसेज दिया जाना है वह भी दिया जा सके।
कहानी: एक गुजराती युवक सत्तू उर्फ सत्यप्रेम, जिसे पहली नजर में नवरात्रि के पांडाल में कथा से प्रेम हो जाता है। हालांकि, कथा एंगेज होने की बात कह चली जाती है। अगली नवरात्रि पर गरबा के पांडाल में कथा के न आने पर वह उसके घर पहुंचता है, जहां कथा सुसाइड अटेंप्ट करती है। वह उसे अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाता है। कुछ समय बाद दोनों की शादी कर दी जाती है, लेकिन कथा बहाने बनाकर उसे अपने पास सोने से मना करती है...।
डायरेक्शन: समीर विदवांस ने एक खूबसूरत पटकथा को बेहद ही खूबसूरती और सादेपन के साथ पर्दे पर उकेरा है। उन्होंने इसमें अपनी और से कुछ ज्यादा तामझाम करने की कोशिश नहीं की। इसलिए फिल्म लोगों के जेहन में उतरने में कामयाब रहेगी।
एक्टिंग: कार्तिक ने गुजराती सत्तू के किरदार को पूरी तरह जीया। पूरी फिल्म में वह सत्तू ही नजर आए। कथा की मन:स्थिति को कियारा ने बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया। गजराज राव, सुप्रिया पाठक, राजपाल यादव आदि सभी अच्छे रहे।
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