
GREAT BARRIER REEF
दुनिया में सबसे बड़ी मूंगे की चट्टान ऑस्ट्रेलिया की गेट बैरियर रीफ पिछले दो दशक से लगातार जलवायु परिवर्तन की कीमत चुका रही है। पिछले पांच वर्ष में ही करीब 40 फीसदी प्रवाल विरंजन (क्षरण) ने वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है। कुल तीन लाख 44 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली रीफ दुनिया की प्रवाल भित्ती का दस फीसदी है। ये समुद्री चट्टान देश के सुदूर उत्तर और सुदूर दक्षिण में समुद्र तट के पास हैं। आस्ट्रेलिया के जेम्स कुक विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि पिछले पांच विरंजन की घटनाओं के बाद यहां प्रवाल भित्तियों की संख्या काफी कम हो गई है। 2016 और 2017 के बीच यहां आधे मूंगेे कम हो गए।
इंसानी गतिविधियां बड़ा कारण
पर्यावरणीय प्रतिकूलता प्रवाल क्षरण के लिए सबसे बड़ा कारण है। मानव निर्मित ग्रीनहाउस गैस को 90 फीसदी समुद्र अवशोषित कर रहे हैं, जिससे इनमें कार्बन डाइ ऑक्साइड घुल रहा है। इससे कार्बोनिक एसिड बनता है और समुद्र का पानी अम्लीय होने लगता है। इस काण मूंगे शैवाल को अपने से दूर कर देते हैं, जिससे शैवाल और मंगे नष्ट हो जाते हैं।
सात करोड़ फुटबॉल मैदान जितनी बड़ी चट्टान
3,44400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली ग्रेट बैरियर रीफ का क्षेत्रफल इटली, जापान, जर्मनी और मलेशिया के बराबर है। 2300 किलोमीटर लंबी मूंगे की यह विशाल चट्टान सात करोड़ फुटबॉल मैदान में फैली है।
खतरनाक हो रहे हैं ऑस्ट्रेलिया के सागर
कुछ वर्षों से ऑस्ट्रेलिया के समुद्र जलीय जीवों के खतरा बनते जा रहे हैं। पिछले महीने ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण में तस्मानिया हार्बर में करीब पांच सौ पायलट व्हेल फंस गई थी। इनमें 380 की मौत हो गई, जबकि बाकी को बचा लिया गया। ग्लोबल वार्मिंग को इसकी वजह बताया गया। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों ने जियोमैग्नेटिक दुष्प्रभाव के कारण ये हादसा बताया, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
Published on:
14 Oct 2020 04:42 pm
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