
स्मार्ट डिब्बों में भोजन का वजन भी होता है।
जयपुर.
दुनिया में प्रतिदिन खरीदे जाने वाले एक तिहाई से अधिक खाद्य पदार्थ फेंक दिए जाते हैं, जिससे 86 करोड़ लोगों की भूख मिटाई जा सकती है। ऑस्ट्रेलिया सबसे अधिक भोजन की बर्बादी करता है तो चीन में यह आंकड़ा सबसे कम है। हाल ही एक रिपोर्ट में वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम ने दो करोड़ टन खाने को बर्बादी को रोकने की योजना बनाई है, जो 2030 तक वैश्विक खाद्य प्रणालियों को सुधारने में मददगार हो सकती है। खाने की बर्बादी को रोकने के लिए आज पूरी दुनिया में नित नए उपाय आजमाए जा रहे हैं। इनमें दक्षिण कोरिया पहल प्रमुख है, जो 95 फीसदी फूड वेस्ट को रिसायकल कर रहा है।
2005 में कचरागाह में जाने वाले बचे हुए भोजन पर प्रतिबंध लगा दिया था और 2013 में सरकार ने विशेष बायोडिग्रेडेबल बैग का उपयोग कर खाद्य अपशिष्ट की रिसाइक्लिंग करने को अनिवार्य कर दिया। इस बैग के लिए हर परिवार को प्रतिमाह औसत 6 डॉलर चुकाना होता है। इस बचे हुए खाने को इकट्ठा कर उर्वरक (खाद) बनाया जाता है। इस योजना पर होने वाली राशि का 60 फीसदी हिस्सा बैग की कीमत से मिलता है। सरकार ने फूड वेस्ट से खाद बनाने की मंजूरी दी है, हालांकि इसका कुछ हिस्सा पशु आहार के रूप में भी इस्तेमाल हो रहा है।
ऐसे काम करते हैं बायोडिग्रेडेबल डिब्बे
योजना में प्रौद्योगिकी का बड़ा योगदान है। राजधानी सियोल में मापक और रेडिया फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन से लैस 6 हजार डिब्बे रखे गए हैं, जो बचे खाद्य पदार्थ का वजन कर आइडी के हिसाब से व्यक्ति के हिस्से में जोड़ दिया जाता है। इस पद्धति ने छह वर्ष में शहर में 47 हजार टन भोजन की बर्बादी को कम किया है। इसके लिए लोगों से अपील की जाती है कि ड्राय और लिक्विड फूड को संबंधित डिब्बों में ही डालें।
संयंत्रों में करते हैं अलग
बायोडिग्रेडेबल बैग में एकत्र बचे खाने से नमी को अलग किया जाता है। जिसका उपयोग बायोगैस और जैव तेल बनाने में होता है। सूखे फूड वेस्ट को उर्वरक में बदला जाता है, जो कृषि में इस्तेमाल होता है।
उर्वरक से होती है मशरूम की खेती
सियोल में सामुदायिक उद्यानों या शहरी खेतों की संख्या सात वर्ष में छह गुना बढ़ी है। अब ये 170 हेक्टेयर में हैं जो लगभग 240 फुटबॉल मैदानों के बराबर होता है। इनमें ज्यादातर अपार्टमेंट के बीच, स्कूल और नगरपालिका भवनों के ऊपर बने हुए हैं। कुछ तो अपार्टमेंट के तहखाने में हैं। इनका उपयोग मशरूम उगाने में किया जाता है। शहरी सरकार स्टार्टअप के लिए इसके लिए 80 से 100 फीसदी तक राशि देती है। इनमें फूड वेस्ट से बने उर्वरक इस्तेमाल किए जाते हैं।
Updated on:
24 Nov 2019 08:44 pm
Published on:
24 Nov 2019 08:25 pm
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