
She News : खुद भी पढ़ीं, बच्चों को भी पढ़ाया, हारी नहीं यह 'मां'
सरिता दुबे. रायपुर. पढ़ाई के साथ नौकरी और चार बच्चों की परवरिश, जीवन में कई संघर्ष आए, लेकिन इस मां ने हार नहीं मानी। ये कहानी है रायपुर की विमला माहेश्वरी की, जिन्होंने 1974 में मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से स्नातक किया। आज वे समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं और बेटियों की शिक्षा की हिमायती हैं। विमला कहती हैं कि परिवार वाले उन्हें आगे की पढ़ाई नहीं कराना चाहते थे, क्योंकि उनका मानना था कि बेटियों को ज्यादा नहीं पढ़ाना चाहिए, लेकिन पिता ने उनका साथ दिया। इस वजह से वे स्नातक कर पाईं।
विमला ने महिलाओं के लिए शिक्षा की अहमियत को समझते हुए अपनी तीनों बेटियों को अच्छी शिक्षा दी और उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के काबिल बनाया। वे कहती हैं कि पढ़ाई के साथ नौकरी करते हुए अपने चार बच्चों की परवरिश करना आसान नहीं था। जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया। 1984 में जब स्नातकोत्तर किया तब उन्होंने पोस्ट ऑफिस सेविंग का काम शुरू किया। पति अक्सर नौकरी के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते थे। घर-परिवार की हर जिम्मेदारी को उन्होंने ही उठाया। अपने शौक एक तरफ रखकर बच्चों के लिए ही जीवन समर्पित किया। वे माहेश्वरी समाज की महिला अध्यक्ष भी रहीं।
आज भी हैं आत्मनिर्भर
विमला माहेश्वरी उम्र के 68वें पड़ाव पर होने के बावजूद आज भी पोस्ट ऑफिस सेविंग का काम करती हैं। वे कहती हैं कि हौसला हो तो महिलाएं हर मंजिल पा सकती हैं, क्योंकि हिम्मत और लगन ही उन्हें आगे बढ़ाती है। आज भी मैं आत्मनिर्भर हूं। वे कहती हैं कि मैंने जीवन में शिक्षा को महत्त्व दिया, इस कारण ही समाज में पहचान बनाई है।
Published on:
23 May 2021 10:57 pm

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