जयपुर। सरकार ने राजकीय उपक्रम, स्वायत्तशाषी निकायों और विश्वविद्यालयों में सशर्त ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने के आदेश दिए हैं। इसका लाभ तभी मिलेगा जब वे 20 जून तक सालाना 12 फीसदी ब्याज की दर से एनपीएस का पैसा पेंशन निधि खाते में लौटाएंगे। विश्वविद्यालयों के करीब तीन हजार शिक्षक-कार्मिक सरकार के इस आदेश के विरोध में उतर आए हैं। बुधवार को एक दर्जन से अधिक विश्वविद्यालयों में शिक्षकों ने धरना देकर सरकार के खिलााफ नाराजगी जाहिर की। राजस्थान विश्वविद्यालय में शिक्षकों ने वीसी सचिवालय पर धरना दिया। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी विभागों में ऐसी कोई शर्त लागू नहीं की है। इनका कहना है कि राज्य सरकार खुद केन्द्र से एनपीएस का पैसा लाने का लड़ाई लड़ रही है, वहीं विश्वविद्यालयों के कार्यरत शिक्षक एनपीएस का पैसा कहां लाएंगे।
राजस्थान विश्वविद्यालय पर पड़ेगा 35 करोड़ का भार
इस शर्त के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर अन्य विभागों के तर्ज पर ही ओपीएस लागू करने की मांग की है। इसी प्रकार अधिकतर विश्वविद्यालयों ने भी सरकार इस शर्त को खारिज कर दिया है। राजस्थान विश्वविद्यालय में करीब 700 शिक्षक और कार्मिक कार्यरत है। नए नियमों के अनुसार विवि को ब्याज के साथ करीब 35 करोड़ रुपए देने होंगे।
शिक्षकों का तर्क
– सरकार ही एनपीएस का पैसा नहीं ला पा रही, शिक्षक कैसे लााएंगे
– सेवानिवृत्ति के बाद ही एनपीएस का पैसा लेने का नियम हैं, ऐसे में रिटायर्डमेंट तक कैसे इंतजार करेंगे।
– विश्वविद्यालयों की आर्थिक िस्थति ठीक नहीं है, विवि अगर पैसा लौटाएगा तो व्यवस्था और चरमराएगी
– शिक्षकों को लोन लेकर पैसा चुकाने की नौबत आ जाएगी::
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– 3000 से अधिक शैक्षणिक और अशैक्षणिक स्टाॅफ है, विश्वविद्यालयों में
– 700 शिक्षक-कार्मिक राजस्थान यूनिवर्सिटी में है
– 12 फीसदी ब्याज दर से लौटाने के आदेश हैं
– 20 जून तक लौटाना होगा पैसा
सरकार ओपीएस को लेकर आ रही विसंगतियों को जल्द से जल्द दूर करें। धसरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आगामी सप्ताह में राजस्थान के समस्त विश्वविद्यालय के कार्मिकों की ओर से जयपुर में सामूहिक प्रदर्शन किया जाएगा।
डॉ. संजय कुमार
, अध्यक्ष, राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ