
आए दिन हो रहे हादसों के बाद भी नहीं लिया सबक, झालावाड़ के अस्पताल में सोमवार को ही हुआ है हादसा
बरसों से कंपनी नहीं ले रही सुध
चिकित्सा संस्थानों में आग लगने की घटनाओं के बाद भी जिम्मेदार नहीं चेत नहीं रहे हैं। झालावाड के एक अस्पताल के आईसीयू में सोमवार को आग लगने की घटना के बाद जब जिले के सबसे बड़े सरकारी जनाना अस्पताल के फायर फाइटिंग सिस्टम के हालात जाने तो कड़वी हकीकत सामने आई। जिम्मेदारों की अनदेखी का नतीजा है कि नेहरू पार्क के पास बरसों पहले बने जनाना अस्पताल के फायर फाइटिंग सिस्टम की एनओसी तक नहीं है।
स्थिति यह है कि अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने वाली कंपनी ने सिस्टम की सुध तक नहीं ली। इससे हालत यह हो गए हैं कि अस्पताल में जगह-जगह लगे फायर हाइड्रेंटस बरसों से मैन्टीनेंस को तरस रहे हैं। राजकीय जनाना अस्पताल में रोजाना औसतन डेढ हजार से ज्यादा लोगों की आवाजाही रहती है वहीं अस्पताल में हर समय दो सौ से ज्यादा महिलाएं व बच्चे भर्ती रहते हैं। कमोबेश यही स्थिति कल्याण अस्पताल और अन्य बहुमंजिला भवनों की है। नियमानुसार किसी भी बहुमंजिला बिल्डिंग में फायर फाइटिंग सिस्टम को लेकर एनओसी लेना अनिवार्य है। इससे मरीजों की सुरक्षा के लिए दंभ भरने वाले प्रशासन के दावों की हकीकत सामने नजर आ रही है।
कमियां नहीं हुई पूरी
नगर परिषद की अग्निशमन विभाग की टीम ने वर्ष 2022 में फायर फाइटिंग सिस्टम की एनओसी के लिए आवेदन किया था। इसके लिए आवेदन करने पर करने पर पहुंची टीम को अस्पताल में एसएनसीयू, एनआईसीयू, ओपीडी, स्वागत कक्ष, लेबर रूम, बिजली पैनल रूम, पहली मंजिल, गायनीवार्ड, डीडीसी लॉबी, ओटी और पीएनसी, दूसरी मंजिल पर लैब सहित पूरे ऑटो डिटेक्शन सिस्टम की मैन्टीनेंस की कमी मिली। रिपोर्ट के अनुसार फायर फाइटिंग सिस्टम की एनओसी के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से इन कमियों को पूरा करने पर ही एनओसी के लिए आवेदन किया जा सकेगा।
हर वार्ड को जोड़ा
अस्पताल भवन के निर्माण के समय लगाए गए फायर फाइटिंग सिस्टम से परिसर में ओपीडी से लेकर प्रत्येक वार्ड तक लाइन बिछाई गई है। सिस्टम के तहत अस्पताल मे आग बुझाने के लिए पानी का टैंक है तो लेकिन अनहोनी होने पर फायर फाइटिंग सिस्टम शुरू के लिए मोटर तक नहीं है। नियमानुसार फायर फाइटिंग सिस्टम के लिए दो मोटर जरूरी है जिसमें एक मोटर हर समय स्टैंड बाय रहनी चाहिए। इसी तरह मोटर और फायर फाइटिंग सिस्टम का कनेक्शन जनरेटर से होना जरूरी है, क्योंकि आग लगने की स्थिति में सबसे पहले बिजली की लाइन काट दी जाती है। इसके अलावा आग बुझाने के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षित भी होना जरूरी है। हालांकि अस्पताल में कई जगह आग बुझाने वाले सिलेंडर लगाए हुए हैं।
पत्र लिखा है...
अस्पताल का फायर फाइटिंग सिस्टम सहित अन्य कमियों को पूरा करने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग से चर्चा कर पत्र लिखा गया है। विभाग ने जल्द ही फायर फाइटिंग सिस्टम की कमियों को दूर करने का आश्वासन दिया है। इसको लेकर कंपनी को पहले भी पत्र व्यवहार किया जा चुका है।
डॉ. केके अग्रवाल, अधीक्षक कल्याण अस्पताल, सीकर
Updated on:
20 May 2025 10:47 am
Published on:
20 May 2025 10:46 am
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