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मदद करने के तरीके

जब आपका अपना कोई विपरीत परिस्थितियों से गुजर रहा हो, तो उसकी मदद करना स्वाभाविक सा हो जाता है। लेकिन कई बार हम यह पता नहीं लगा पाते कि मदद करें तो कैसे करें और क्या करें। याद करें जब आप प्रॉब्लम में थे तो आपकी दोस्तों ने कैसे मदद की थी। उस समय आपको क्या सबसे ज्यादा हैल्पफुल लगा था। कुछ दोस्तों ने आपसे दूरी बना ली होगी, जो कि आपके लिए दुखदायी रहा होगा। जबकि हो सकता है उन लोगों को समझ नहीं आया होगा कि वो क्या कहें अथवा करें। उनको यह भी लगा हो सकता है कि अगर आपको कोई मदद चाहिए होगी तो आप बोल दोगे।

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Kanchan Arora

Jan 29, 2021

मदद करने के तरीके

मदद करने के तरीके

रोने के लिए सिर्फ कंधा ही नहीं, प्रैक्टीकल मदद भी करें
बहुत से लोग मदद मांगने में झिझक महसूस करते हैं, तो ऐसे में आप आगे बढ़कर हेल्प के लिए पूछेंगे तो उनको अच्छा लगेगा। जब लोग तकलीफ में होते हैं, तो उनको हर दिन के रूटीन कार्य भी मुश्किल लगने लगते हैं। तो आप उनका दुख बांटने के लिए बजाय सिर्फ अपना कंधा देने के कुछ प्रैक्टीकल हैल्प करने के बारे में भी सोचें। जैसे आप उनको ऑफर कर सकते हैं मैं बाजार जा रहा अथवा रही हूं, आप अपनी शॉपिंग लिस्ट चाहें तो मुझे दे सकते हैं, मैं आपका सामान भी लाकर दे दूंगा अथवा दूंगी।

संवदेनशील बने रहें
आप मदद के लिए अपना हाथ बढ़ाएं, लेकिन अगर आपका दोस्त मदद लेने से इन्कार कर दे तो जिद्द न करें और न ही बुरा मानें। मदद न लेने का कारण कुछ भी हो सकता है, जैसे सामने वाले को अपने आप पर पूरा भरोसा होगा कि वो मैनेज कर लेगा या फिर उसने इससे पहले कभी किसी से मदद न ली हो। इसके अलावा यह भी हो सकता है कि उनको वास्तव में हैल्प की जरूरत हो ही ना। लेकिन इसका यह मतलब बिलकुल नहीं है कि भविष्य में कभी भी आप अपना हाथ मदद के लिए नहीं बढ़ाएंगे, संवेदनशीलता बनी रहनी चाहिए।

इतनी भी मदद न करें कि स्वयं ही संकट में आ जाएं
मदद करने से पहले सावधानी से सोचें कि क्या और कितनी मदद आप कर सकते हैं। अपने दोस्त को बहुत ज्यादा परेशान और दुखी देखकर भावनाओं में बहकर आपका उसके लिए कुछ भी कर जाने का मन करेगा। ऐसे में कहीं ऐसा न हो कि आप खुद संकट में आ जाए और फिर आपको सबके आगे हाथ फैलाना पड़े। इसके अलावा एक और बात का खयाल भी रखें, जो करें, जितना करें, पूरे मन से करें। इससे सामने वाले को भी अच्छा महसूस होगा।

बिना मांगे सलाह न दें
जब भी आपका अपना कोई परेशानी में हो और वह आपसे दुख बांटना चाहता है, तो इत्मिनान से सुने जरूर लेकिन सलाह तब तक न दें, जब तक वह मांगे नहीं। आपका दोस्त मैच्योर है और वह अपने निर्णय खुद से लेने की काबिलियत रखता है। ऐसे में आप ऐसा बिलकुल भी ना सोचें कि आपको पता है उसके लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा। हां अगर आपको लगता है कि वह अपने आपको या फिर किसी और को नुकसान पहुंचा सकता है तो जरूर आगे बढ़कर मदद करें।

एक वॉयज मैसेज से भी राहत
आपके दोस्त को मदद चाहिए और आप उसके साथ उस शहर में नहीं है और आपके पास पर्याप्त पैसा भी नहीं है मदद करने को तो भी आप उसे कॉल करके या फिर वॉयज मैसेज के जरिए उसको यह अहसास करवा सकते है कि आप उसके साथ है। जब कोई तकलीफ में होता है तो एक छोटा सा वॉयज मैसेज भी राहत का काम कर जाता है। इसके अलावा आप थोड़ा रिसर्च वर्क करके उसे उन संगठनों अथवा सपोर्ट गु्रप्स के नाम भेजकर मदद कर सकते हैं, जिनसे वह मदद ले सकता है।

अन्य से न करें शेयर
दोस्त ने आपसे अपनी परेशानी शेयर की है तो आपका दायित्व बनता है कि उसे सिर्फ अपने तक ही रखें, न कि अन्य लोगों से उसे शेयर करें। इससे आपके दोस्त को और भी दुख हो सकता है।

सुने ज्यादा, बोलें कम
अगर आपको बोलने का ज्यादा और सुनने का शौक कम है तो अपनी इस आदत को बदल डालिए। परेशान व्यक्ति को कभी-कभी अपना दर्द बांटने वाला चाहिए होता है, बाकि उसे कोई हैल्प नहीं चाहिए होती। तो ऐसे में आप उसे बीच-बीच में अपनी राय देंगे तो उसको बुरा लग सकता है। आपको उसकी समस्याएं सुनकर दुख भी हो रहा होगा और गुस्सा भी, लेकिन उस समय आपको अपने इमोशंस पर नियंत्रण रखना होगा। जब तक सामने वाला खुद आपसे सलाह न मांगे, आप सिर्फ उसकी बात सुनें बिना कुछ बोले।