
किसान समूह द्वारा लगाए गए अमरूद।
कार्कल (उडुपी). करावली (तटीय) क्षेत्र में अमरूद को वाणिज्यिक फसल के रूप में उगाना दुर्लभ माना जाता है। लेकिन कार्कल तालुक के इन्ना गांव के कुछ किसानों ने इस चुनौतीपूर्ण प्रयास को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है। यहां के अत्यधिक वर्षा वाले मौसम में अमरूद की खेती आसान नहीं है, फिर भी किसानों ने प्रयोगात्मक रूप से इसे अपनाया और संतोषजनक परिणाम देख रहे हैं।
करीब पांच वर्ष पूर्व किसानों के एक समूह ने अमरूद की खेती शुरू की थी। वर्तमान में 8-10 किसान लगभग 5 एकड़ भूमि पर खेती कर रहे हैं। बेंगलूरु कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित ‘अर्क किरण’ किस्म यहां लगाई गई है।
किसानों ने उद्यान विभाग की सब्सिडी और ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग कर वैज्ञानिक पद्धति से खेती की है। हालांकि बाजार में मांग होने के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
किसान दीपक कामत ने कहा कि अमरूद की खेती अकेले करना कठिन है। समूह में खेती करने से सब्सिडी और विपणन दोनों में सुविधा होती है। उचित प्रबंधन से अच्छी पैदावार संभव है।
‘अर्क किरण’ किस्म का अमरूद स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर है। इसकी बाहरी परत मुलायम होती है। इसे सीधे किसानों से खरीदा जा सकता है। अमरूद का उपयोग खाने के अलावा आइस्क्रीम, जूस और जैम बनाने में भी किया जा रहा है।
बेंगलूरु और घाट क्षेत्रों में अमरूद से वर्ष में तीन फसलें ली जाती हैं। लेकिन करावली के मौसम में किसान केवल दो फसलें (बरसात से पहले और बाद में) ही ले पा रहे हैं। शुरुआत में विभाग ने सब्सिडी सहायता दी थी। उत्पादन कभी अच्छा होता है, कभी कम। फिर भी किसानों का उत्साह उल्लेखनीय है।
-श्रीनिवास, सहायक निदेशक, बागवाना विभाग
Published on:
28 Jan 2026 08:25 pm
बड़ी खबरें
View Allखास खबर
ट्रेंडिंग
