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75 की उम्र में शुरू किया बिजनेस, मानती हैं जीवन का मजा काम से आता है आराम से नहीं

आधी आबादी यानी महिलाओं की सोच को अखबार में उतारने के लिए पत्रिका की पहल संडे वुमन गेस्ट एडिटर के तहत आज की गेस्ट एडिटर उर्मिला अशर हैं। आपने 75 वर्ष की उम्र में क्लाउड किचन से बिजनेस की शुरुआत की। आप यूट्यूबर हैं और मास्टरशेफ इंडिया का हिस्सा भी रही हैं। आपका कहना है कि उम्र चाहे कोई भी हो जिंदादिली बनी रहनी चाहिए। जीवन में मजा काम करने से आता है, आराम से नहीं। यही मेरी खुशी की रेसिपी है। सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती।
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जयपुर

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Jaya Sharma

Nov 17, 2023

 उम्र चाहे कोई भी हो जिंदादिली बनी रहनी चाहिए

75 की उम्र में शुरू किया बिजनेस, मानती हैं जीवन का मजा काम से आता है आराम से नहीं

उर्मिला अशर

वुमन गेस्ट एडिटर

बच्चा जब अपनी मां को कहता है कि उसे भूख लगी है तो वह चाहे कितनी भी थकी क्यों न हो, उसके लिए जरूर कुछ बनाती है। दिनभर की थकान के बावजूद न जाने उसमें कहां से ऊर्जा आती है। बच्चे के प्रति प्यार उसे ताकत देता है। कुछ ऐसा ही मेरे साथ है। मुझे दिनभर काम करने में मजा आता है, आराम में नहीं। जितना आप काम करेंगे उतना ही उत्साह बढ़ेगा। उम्र क्या चीज है, यह तो एक अंक है। सक्रिय बने रहेंगे तो जीवन जिंदादिली से जीएंगे। मैं महिलाओं से यही कहती हूं कि आप भले ही गृहिणी हों, लेकिन हर महिला के कोई न कोई अरमान जरूर होते हैं। हर महिला चाहती है कि उसे पहचान मिले। जो काम आता है, उससे शुरुआत करें। अपनी जिम्मेदारियां निभाएं लेकिन सपनों को न खत्म करें।

खाना बनाना आना चाहिए : मैं नई पीढ़ी से यही कहना चाहूंगी कि आप चाहे कितने पढ़ लिख जाएं, अफसर बन जाएं लेकिन खाना बनाना जरूर सीखें। क्योंकि खाना तो सभी खाते हैं। बनाना आएगा तो कभी परेशान नहीं होना पड़ेगा।

सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती, बस जज्बा होना चाहिए

हितेश शर्मा
भोपाल. उम्र के किसी भी पड़ाव पर सपनों को पूरा किया जा सकता है। 50 की उम्र के बाद जब सभी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गई तो लगा अब मुझे कुछ नया करना चाहिए। सेना में पदस्थ पति ब्रिगेडियर राजेश जोशी के साथ आयरनमैन स्पर्धा की ट्रेनिंग शुरू की। 2019 में गोवा में हुई स्पर्धा में दोनों ने हिस्सा लिया व पूरा किया यह कहना है 58 वर्षीय पूनम जोशी का। पूनम का कहना है कि मेरे बेटा और बहू भी दोनों आर्मी ऑफिसर हैं। 2015 में महू में पति की पोस्टिंग के दौरान मैंने फिटनेस के लिए रनिंग करना शुरू किया। इसके बाद करगिल में पोस्टिंग के दौरान भी वहां खुद को फिट रखने के लिए रनिंग करती थी। 2017 में जब भोपाल आई तो रन भोपाल रन से जुड़ गई। यहां मैराथन में हिस्सा लिया। रन भोपाल रन की एंबेसेडर बन गई। इस बीच आयरनमैन स्पर्धा का पता चला। पति से इस बारे में बात की और उन्होंने स्वयं भी हिस्सा लेने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि मैं जिस तरह फिट रहकर सेना में आया। उसी तरह फिट रहकर ही मैं सेवानिवृत्त होना चाहता हूं। फिर हम दोनों ने एक साथ ट्रेनिंग करना शुरू किया।

वेलेंटाइन डे पर डेढ़ लाख की साइकिल गिफ्ट की

वह कहती हैं कि पति राजेश जोशी ने वेलेंटाइन डे पर डेढ़ लाख की साइकिल गिफ्ट की। 1998 के बाद पहली बार था जब मैंने साइकिल चलाई। सुबह 4.30 बजे उठकर दौडऩा, तैराकी और साइकिलिंग की ट्रेनिंग करने लगे। आयरनमैन स्पर्धा स्वीमिंग में 1.9 किलोमीटर समुद्र में, 90 किलोमीटर साइकिलिंग और 21.1 किलोमीटर रनिंग कर पूरी की।

यहां महिलाओं ने खुद को सशक्त बनाया

सरिता दुबे
रायपुर. गरियाबंद में पहाड़ों के नीचे बसे मलियारी गांव की विशेष पिछड़ी जनजाति के 45 परिवारों का बाहरी दुनिया से कोई लेना देना नहीं था। शिक्षा भी यहां तक नहीं पहुंची थी। वहां धीरजा बाई कमार समुदाय के लिए आशा की किरण बनीं। आज महिलाएं यहां पर काम कर रही है और पुरूष उनका हाथ बंटाते हैं। उन्होंने सरकारी योजनाओं को गांव तक पहुंचाया और लोगों को उससे जोड़ा। लोक आस्था सेवा संस्थान का इसमें काफी योगदान रहा। उन्होंने यहां लोगों की सोच बदली। धीरजा बताती हैं कि संस्थान जब कमार समुदाय के बीच पहुंचा तो कई लोगों को उनकी भाषा व बातें समझ नहीं आती थीं। धीरजा बाई ने समुदाय के लोगों को एकजुट किया और संस्थान के साथ जब गुजरात गईं तो वहां पता चला कि महिला हिंसा क्या होती है, किस तरह से इस हिंसा का विरोध करना चाहिए। यहां लोग शराब बनाते-पीते थे। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ व मारपीट होती थी। धीरजा बाई ने यहां महिलाओं को जोडऩा शुरू किया। शराब का विरोध होने लगा। महिलाओं ने सभी घरों से शराब निकालकर उसमें आग लगाई।

धान की खेती करने लगी
महिलाएं धान की खेती करने लगीं। पुरुष भी अब इसमें उनका हाथ बंटाने लगे। बाकी समय में बांस की टोकरियां व सूप बनाने लगीं। अब वे सभी अपने बनाए सामान को दूसरे बाजारों में बेचने जाने लगी हैं। इससे वे आर्थिक रूप से मजबूत भी हो रहे हैं।