खेल

रहाणे के पास मां को नायाब तोहफा देने का मौका

अजिंक्य रहाणे खिलाड़ियों पर पैसा बरसाने वाले इंडियन प्रीमियर लीग में मुम्बई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स के लिए 100 से अधिक टी-20 मैच खेल चुके हैं और करोड़ों कमा चुके हैं। 

3 min read
Feb 04, 2015
भारत के लिए 14 टेस्ट और 46 एक दिवसीय मैच खेल चुके माहिर बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे के लिए आज भले ही धन की कोई कमी नहीं, लेकिन एक ऐसा वक्त भी था, जब उनका परिवार क्रिकेट से जुड़े उनके खर्चों को उठाने की स्थिति में नहीं था।

परिवार को सम्मान और पैसे से खरीदा जाने वाला हर एक आराम देने के मामले में रहाणे ने अपने माता-पिता को पूरी तरह संतुष्ट किया है, लेकिन अब उनके सामने अपनी मां को विश्वकप के रूप में वह तोहफा देने का मौका है, जिसका सपना वह खुद भी देखा करते हैं।

रहाणे खिलाड़ियों पर पैसा बरसाने वाले इंडियन प्रीमियर लीग में मुम्बई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स के लिए 100 से अधिक टी-20 मैच खेल चुके हैं और करोड़ों कमा चुके हैं।

रहाणे आईसीसी विश्वकप टीम के लिए भारतीय टीम का हिस्सा हैं। वह टीम के अहम सदस्य हैं और ऐसा कहा जा रहा है कि अगर उनका बल्ला चला तो भारत को विश्वकप जीतने से कोई नहीं रोक सकता।

इस तरह के काबिल क्रिकेट खिलाड़ी को जन्म देने वाले रहाणे के पिता मधुकर रहाणे और माता सुजाता रहाणे को अपने बेटे को लेकर देश के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों में दिख रहे इस विश्वास से अपार खुशी होती है, लेकिन इन दोनों ने अपने इस बेटे को इस स्तर तक पहुंचाने के लिए कई तरह के त्याग किए हैं।

सुजाता रहाणे एक अतिसाधारण मराठी महिला हैं। वह सार्वजनिक तौर पर अपने बेटे को लेकर कोई बात नहीं करतीं, लेकिन बेस्ट के पूर्व कर्मचारी मधुकर का कहना है कि रहाणे को एक सफल क्रिकेट खिलाड़ी बनाने में जितना त्याग सुजाता ने किया है, उसके सामने वह कुछ भी नहीं।

यहां आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचीं सुजाता ने सिर्फ इतना कहा कि वह अपने बेटे से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद करती हैं और चाहती हैं कि टीम विश्वकप जीते, लेकिन सुधाकर ने कुछ ऐसी बातें बताईं, जो साफ बयां करती हैं कि अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने को आतुर रहाणे के पीछे दरअसल एक साधारण परिवार का संस्कार रहा है, जो अपने सपनों को तिलांजलि देकर अपने बेटे के सपनों को सींच रहा था।

मधुकर ने कहा, 'हम उस समय दोम्बीवली में रहा करते थे। हमारे घर से क्रिकेट मैदान लगभग दो किलोमीटर दूर था। रहाणे (अजिंक्य) ने आठ साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था और उस समय उसका भाई सिर्फ आठ महीने का था। मेरी पत्नी अपनी गोद में छोटे बेटे को लेकर और दूसरे हाथ में अजिंक्य का क्रिकेट किट लेकर रोजाना मैदान जाया करती थीं।'

उन्होंने कहा, 'मेरे पास इन सब के लिए वक्त नहीं था। मेरा काम सिर्फ परिवार के लिए धन कमाना था और छोटी सरकारी नौकरी में परिवार बड़ी मुश्किल से चल पाता था। हमारे लिए रहाणे के क्रिकेट के खर्चे का वहन करना मुश्किल था। कई बार मैंने इस ओर गम्भीरता से सोचा, लेकिन मेरी पत्नी ने मुझे रहाणे को खेलने से रोकने से मना कर दिया। उन्हें शायद उसी समय से बेटे की प्रतिभा पर यकीन था।'

रहाणे 17 साल की उम्र में भारत के पूर्व टेस्ट बल्लेबाज और सचिन तेंदुलकर के बचपन के साथी प्रवीण आमरे के शिष्य बने, लेकिन उससे पहले अरविंद कदम नाम के एक व्यक्ति ने रहाणे परिवार को भरपूर मदद की थी। मधुकर कहते हैं, 'अरविंद ने हमारे परिवार की बहुत सहायता की। उन्होंने हमसे बिना कोई पैसे लिए रहाणे को अपनी क्रिकेट अकादमी में अभ्यास का मौका दिया।'

भारतीय टीम विश्वकप जीत पाएगी या नहीं, इस सवाल के जवाब में बेहद सौम्य सुजाता ने सिर्फ मुस्कुराकर कहा कि अच्छा खेले तो जरूर जीतेंगे। जाहिर है, मां होने के नाते सुजाता की दुआएं रहाणे के साथ हैं और टीम का अहम सदस्य होने के नाते वह देश के लिए विश्वकप जीतने का पूरा दम लगाएंगे, लेकिन सुजाता ऐसी मां हैं, जिन्होंने आज तक रहाणे से यह नहीं कहा कि तुम अच्छा खेलते हो या फिर खराब खेलते हो। उन्हें तो बस अपने बेटे की सफलता पर खुशी होती है और वह भी शायद उस दिन के इंतजार में होंगी, जब यह युवा भारतीय टीम विश्वकप लेकर स्वदेश पहुंचेगी।
Published on:
04 Feb 2015 06:50 am
Also Read
View All

अगली खबर