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रेसलर प्रोटेस्ट पर कुछ भी बोलने से बचते दिखे गांगुली, कहा – उन्हें अपनी लड़ाई लड़ने दो

पहलवानों के आंदोलना को लेकर जब सौरव गांगुली से एक प्रेस कांफ्रेस में सवाल पूछा गया तो दादा इसपर कुछ भी बोलने से बचते हुए दिखाई दिये। दादा ने कहा कि मुझे इस मामले के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता है। इसलिए में इसपर कुछ नहीं बोलूंगा। उन्हें अपनी लड़ाई लड़ने दो।

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Wrestlers Protest: देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर भारतीय पहलवानों पिछले 13 दिन से कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरना दे रहे हैं। बृजभूषण पर कई महिला पहलवानों ने मानसिक और शारीरक शोषण का आरोप लगाया है। पहलवान बृजभूषण की गिरफ्तारी के साथ-साथ डब्ल्यूएफआई पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने उनके आंदोलन को लेकर एक बयान दिया है।

एक प्रेस कांफ्रेस के दौरान गांगुली से जब इसको लेकर सवाल किया तो उन्होंने इसपर कुछ भी कहने से इंकार किया कर दिया। दादा ने कहा, 'उन्हें उनकी लड़ाई लड़ने दो। मुझे इस बारे में कुछ पाता नहीं है। बस अख़बार में इसके बारे में पढ़ा है। मैंने एक चीज़ समझी है कि जिस बारे में आपको पूरा पता ना हो उसपर नहीं बोलना चाहिए। लेकिन में आशा करता हूं कि यह जल्द सुलझ जाएगा। रेसलर्स इस देश के लिए बहुत सारे मेडल जीतते हैं और वे ये डीजर्व नहीं करते।'

बता दें भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने पहलवानों के प्रदर्शन को लेकर ताजा बयान जारी किया है। बृजभूषण ने कहा कि उन्हें किसी से कोई द्वेष या बैर नहीं है। वह समाज कल्याण और खिलाड़ियों का भविष्य सुधारने का काम कर रहे हैं। वह अपना काम करते रहेंगे और उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है।

पहलवानों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ही पहलवानों की ओर से दायर याचिका की सुनवाई बंद करने का फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उन्होंने एफआईआर दर्ज करने के लिए याचिका दाखिल की थी, जिसे पूरा किया जा चुका है। अब इस मामले में आगे सुनवाई नहीं बनती है।

साक्षी मलिक ने कहा कि वह शीर्ष अदालत के फैसले का सम्मान करती हैं। अदालत ने वही किया जो इस मामले में किया जा सकता था। विनेश फोगाट ने कहा कि उनके सामने सभी विकल्प खुले हैं। हम वरिष्ठजनों से राय ले रहे हैं कि हमें निचली अदालत जाना चाहिए या फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। दिल्ली पुलिस इसके बाद भी ढिलाई दिखाती है तो उनके पास हाईकोर्ट के बाद वापस सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है।

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