
श्रीगंगानगर।
श्रीगंगानगर में रोक के बावजूद पन्द्रह करोड़ रुपए के लोन देने के घोटाले ने सहकारी बैंकों में कमीशन खेल को उजागर कर दिया है। ब्याज मुक्त लोन के लिए किसानों से सहकारी बैंक के अधिकारी-कर्मचारी कमीशन लेते हैं। किसान जहां लोन के लिए बैंक में चक्कर लगाते हैं वहीं श्रीगंगानगर में तो कमीशन के चक्कर में किसानों को बुला-बुलाकर कर लोन दिया गया है। एक ही शाखा ने मनाही के बावजूद छह करोड़ से अधिक के लोन बांट दिए। तीन माह पहले कमीशन का ऑफर तत्कालीन एमडी के पास पहुंचा तो इस खेल को भांडा फूटा था।
मामले में सबसे पहले रावला ब्रांच के प्रभारी साहबराम सामेटा संदेह के घेरे में आए थे। सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन एमडी के पास एक किसान कमीशन का ऑफर लेकर पहुंचा। वह लोन के लिए कमीशन देने के लिए तैयार था। इस सूचना के आधार पर रावला ब्रांच की पड़ताल की तो करोड़ों के लोन दिए जाने की पुष्टि हुई, जबकि शाखा के खाते में बजट ही नहीं था। उसने दूसरी शाखा से रुपए उधार के रूप में ले लिए। यही कारण है कि सबसे पहले रावला ब्रांच प्रभारी साहबराम को निलम्बित किया गया था। सहकारी बैंक से लोन देने के मामले में राजनीतिक प्रभाव भी काम करता है। अक्सर लोन सहकारी समिति में या राजनीति में प्रभाव रखने वाले किसानों को मिलता है। इसीलिए सरकार ने इस बार अधिक राशि देेने के बजाय अधिक लोगों को लोन देने पर जोर दिया है।
आधा दर्जन से अधिक शाखाओं में घपला
जांच शुरू हुई, जिसमें आधा दर्जन से अधिक ब्रांचों में यह घपला सामने आया। रावला की तरह बींझबायला में करीब पांच करोड़ के लोन बांटे गए। ये सभी लोन कर्जमाफी 2019 में माफ भी हो गए हैं। इनके लोन के बदले किसानों से मोटा कमीशन लेने का आरोप है। जिले स्तर की प्राथमिक जांच में पन्द्रह करोड़ रुपए के लोन वितरित करने की बात सामने आई है। विस्तृत जाच में यह आंकड़ा और बढऩे की आशंका है।
बैंक की मेहरबानी से मिलता है लोन
सहकारी बैंक व सहकारी समिति अल्पकालीन कृषि ऋ ण देती है। इस योजना में ऋ ण के बदले किसान को ब्याज नहीं चुकाना होता है। ब्याज के लिए राज्य व केन्द्र सहकार अनुदान देती है। राष्ट्रीयकृत बैंक लोन के बदले किसान की जमीन गिरवी रखते हैं, जबकि सहकारी बैंक जमीन गिरवी नहीं रखते। ऐसे में किसान का प्रयास रहता है कि अधिक से अधिक रुपए सहकारी बैंक से लोन के रूप में लिए जाएं। किसान को कितना लोन देना है इसके लिए अधिकतम सीमा तो निर्धारित है, लेकिन न्यूनतम सीमा निर्धारित नहीं है। ऐसे में बैंक अधिकारी की मर्जी पर निर्भर करता है कि किस किसान को कितना कर्ज मिलेगा। इसी का फायदा उठाते हुए कमीशन का खेल चलाया जाता है।
Published on:
01 Apr 2019 08:58 am
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