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श्री गंगानगर

कृ​षि भूमि की 1584 बीघा हरियाली विहीन, बना डाली 396 निजी कॉलोनियां

1584 bighas of agricultural land devoid of greenery, made 396 private colonies- यूआईटी ओर जिला प्रशासन की मेहरबानी इतनी कि कंकरीट बना पेराफेरी एरिया

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सुरेंद्र ओझा
श्रीगंगानगर. जिला मुख्यालय की कांकड़ पर जब कोई बाहर से यात्री प्रवेश करता तो खेतों में लहलहाती फसल, हरे पेड़ों पर चहकते पक्षी और हवा का ऐसा झोंका कि दो पल सुकून मिलता। ये अब अतीत हो चुका है। अब दिन और रात एक जैसी गर्मी का माहौल रहने लगा है। जिला मुख्यालय की पेराफेरी में दो दशक में कृषि भूमि से हरियाली साफ कर वहां प्राइवेट कॉलोनी बनाने की हौड़ इतनी अधिक हो गई है कि यह वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण बढ़ गया है। वनस्पति के सफाए से श्रीगंगानगर का तापमान भी ज्यादा रहने लगा है।
नगर विकास न्यास के अनुसार पेराफेरी की 1584 बीघा कृषि भूमि यानी करीब साढ़े 63 मुरब्बा भूमि पर 396 प्राइवेट कॉलोनियां बन चुकी हैं। न्यास के आंकड़ों के अनुसार चार सालों में 512 बीघा पर 128 नई कॉलोनियां बनी है। पूरे जिले में भी प्राइवेट कॉलोनियों के नाम पर हरियाली साफ करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी गई। इस संबंध में पर्यावरणविदों ने प्रभावी ढंग से विरोध नहीं किया।

यहां तक कि जिम्मेदार अफसरों ने भी कॉलोनाइजरों को मुनाफे कमाने में अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग किया। इससे कॉलोनाइजरों की नजरें सूरतगढ़ रोड पर गांव नेतेवाला पार कर गई। वहीं हनुमानगढ़ रोड पर रीको से आगे नई कॉलोनियां बन रही हैं। इधर, श्रीकरणपुर रोड पर गांव 10 जैड तक, केसरीसिंहपुर रोड पर गांव मिर्जेवाला तक, पदमपुर रोड पर गांव सात ए तक, हिन्दुमलकोट रोड पर गांव कालियां, अबोहर रोड पर गांव साधुवाली तक, सादुलशहर रोड पर गांव बनवाली तक प्राइवेट कॉलोनियों का जाल बिछ चुका है।
इस बीच, पर्यावरण प्रेमी पूर्ण बिश्नोई का कहना है कि पेराफेरी में प्राइवेट कॉलोनियों की हौड़ से वनस्पतियां साफ कर दी गई हैं। हरे पेड़ों को काट दिया गया, लेकिन जिला प्रशासन, यूआईटी प्रशासन और वन विभाग ने चुप्पी साधे रखी। इसका असर प्रकृति पर पडऩे लगा है। अगले कुछ सालों में हरियाली साफ करने का खमियाजा भी भुगतना पड़ेगा। प्रकृति बड़े परिवर्तन की ओर अग्रसर है। करीब एक दशक से प्रकृति का रवैया ज्यादा कठोर हुआ है। बीते ग्रीष्मकाल में अत्यधिक गर्मी और शरदकाल में लम्बे समय तक अत्यधिक ठंड का रहना व वर्षा में अनियमितता अब दिखने लगी है। इस कारण पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक प्राणी की जीवनशैली पर प्रभाव पड़ा है। प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ के परिणाम भयावह हो होंगे।

यह होती है पैराफेरी
ऐसे ग्रामीण इलाके जो नगर परिषद, नगर पालिका, यूआईटी या विकास प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में आ जाते हैं। उन एरिया में जमीनों के भू-उपयोग परिवर्तन, कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन का जिम्मा इन्हीं निकायों के पास आ जाता है। हालांकि ऐसे एरिया में पंचायत समितियां व ग्राम पंचायतें भी होती हैं। जिला मुख्यालय पर करीब 56 चक ऐसे हैं जो पेराफेरी एरिया के दायरे में है।