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21 दिन बाद फिर से लाइटअप हुआ सुपर क्रिटीकल इकाई का बॉयलर।

-नव निर्मित 660 मेगावाट की सातवीं सुपर क्रिटीकल इकाई के प्री एयर हीटर में लगी आग के कारण रुका स्टीम ब्लोइंग कार्य फिर से शुरू करने की प्रक्रिया रविवार से शुरू की गई।

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21 दिन बाद फिर से लाइटअप हुआ सुपर क्रिटीकल इकाई का बॉयलर।

सूरतगढ़ थर्मल.

नव निर्मित 660 मेगावाट की सातवीं सुपर क्रिटीकल इकाई के प्री एयर हीटर में लगी आग के कारण रुका स्टीम ब्लोइंग कार्य फिर से शुरू करने की प्रक्रिया रविवार से शुरू की गई। विगत 25 जून को एयर प्री हीटर में लगी आग के कारण बॉयलर बन्द होने के कारण पिछले 21 दिनों से सातवी सुपर क्रिटीकल इकाई के बॉयलर में स्टीम ब्लोइंग का कार्य रुका हुआ था। जिसे रविवार सुबह 8 बजकर 34 मिनट पर फिर से बॉयलर लाइटअप कर पुनः स्टीम बॉलिंग का कार्य शुरू किया गया।


दूसरे एयर प्री हीटर को लेंगे काम मे

सुपर क्रिटीकल इकाईयो के मुख्य अभियन्ता बी पी नागर ने बताया कि आग के कारण क्षतिग्रस्त हुए एयर प्री हीटर को एक बार आइसोलेट कर इकाई के दूसरे एपीएच को काम मे लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्टीम ब्लोइंग प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद इकाई को ऑइल पर सिंक्रोनाइज करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिसके कारण इकाई को सिंक्रोनाइज होने में अभी कुछ समय और लगेगा।

सामने आई कई खामियां सामने

सातवीं सुपर क्रिटीकल इकाई के एयर प्री हीटर में लगी आग के कारणों की जांच करने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट में कई खामियां आने सामने आई है।विश्वस्त जानकारी के अनुसार घटना के समय एयर प्री हीटर में आग को नियंत्रित करने के लिए लगी पानी की पाइप काम नही कर रही थी वही स्टेशन ट्रांसफार्मर ट्रिप होने पर वैकल्पिक तौर पर बिजली आपूर्ति करने के लिए लगाया गया डीजी सेट भी काम नही कर रहा था। जिसके कारण बन्द हुए एपीएच में गर्मी से आग लग गई।


इसके अलावा सुपर क्रिटीकल इकाईयो के फायर टेंडर चालू नहीं होने से वर्तमान में उत्पादन कर रहे 1500 मेगावाट थर्मल से फायर टेंडर बुलाने पड़े थे।

करीब 15 करोड़ का नुकसान

जानकारों के अनुसार आग से 12 से 15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।हालांकि ये नुकसान निर्माण कम्पनी भेल द्वारा वहन किया जाएगा, लेकिन इसके कारण इकाई का जुलाई में प्रस्तावित सिंक्रोनाइजेशन भी अब 5 से 6 माह बाद हो पायेगा। जिसके कारण पहले से ही दो वर्ष देरी से चल रही एवम करीब 2400 करोड़ ब्याज की राशि भुगत रही सुपर क्रिटीकल परियोजना की लागत में बढ़ोतरी तो होगी ही साथ ही प्रदेश को बिजली उत्पादन देरी से होने से कई सौ करोड़ो रूपये का नुकसान होगा।


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