
रिड़मलसर सीएचसी में डॉक्टरों के 7 पद स्वीकृति, एक डॉक्टर का भी पीजी में सिलेक्शन, नर्सिंग स्टॉफ के सहारे पीएचसी
भूपेंद्र सिंह दहेल
रिड़मलसर. राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग को लेकर किए जा रहे बड़े- बड़े दावे जमीनी स्तर पर बिल्कुल खोखले साबित हो रहे हैं। चिकित्सा विभाग रिड़मलसर सीएचसी के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। कस्बे की करीब 30 हजार से अधिक आबादी पर एक सीएचसी है। रिड़मलसर सीएचसी के अधीन 9 सब सेंटर आते हैं। 30 बैड की सीएचसी में प्रतिदिन डेढ़ सौ से अधीन की ओपीडी रहती है। डॉक्टरों के पद रिक्त होने के कारण डेढ़ सौ की ओपीडी पर मात्र एक डॉक्टर देख रहा है। एकमात्र डॉक्टर भी पीजी में सिलेक्शन होने से उच्च शिक्षा के लिए जा रहे हैं। पहले डॉक्टर को सीएचसी इंचार्ज होने के कारण उनको मीटिंग व निरीक्षण आदि में भी जाना पड़ता है तो ऐसे में नर्सिंग स्टाफ के सहारे ही चलता है। जबकि नियमानुसार नर्सिंग स्टॉफ दवाईयां नहीं लिख सकते। सीएचसी पर 2 स्पेशलिस्ट (सर्जन, मेडिसिन), 4 चिकित्सा अधिकारी व एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी का पद स्वीकृत है। परंतु मौके पर सिर्फ दो डॉक्टर पदस्थापित हैं। जिसमें से एक महिला चिकित्सक मेटरनिटी लीव पर हैं। जिसके चलते सीएचसी प्रभारी डॉक्टर पूरी ओपीडी को देखने को मजबूर है। जिस दिन चिकित्सा प्रभारी मीटिंग या निरीक्षण में होते हैं तो मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं 9 सब सेंटरों में से 3 सब सेंटर पर एएनएम की पोस्ट खाली पड़ी है।
ना अस्पताल की चार दिवारी ना डॉक्टरों को रहने के लिए आवास
राज्य सरकार द्वारा करीब 5 करोड़ की बड़ी राशि से अस्पताल का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन चिकित्सा स्टॉफ के रहने के लिए आवासीय मकान एक भी नहीं बनाया। ऐसे में इस क्षेत्र में डॉक्टर आने से कतराते हैं। चिकित्सा स्टॉफ ने बताया कि अस्पताल मंडी से एक किमी दूरी पर होने के कारण चिकित्सा स्टॉफ को रहने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कई डॉक्टर तो ज्वाईनिंग से पहले ही अपना स्थानांतरण अन्यत्र करवा चुके हैं। वहीं अस्पताल की चारदिवारी नहीं होने के कारण आसपास के खेतों से जहरीले जानवरों का अस्पताल में घुसने की आशंका बनी रहती है।
नहीं है एंबुलेंस की सुविधा कस्बे में सरकार ने 30 बैड की सीएचसी तो मंजूर कर दी परंतु सुविधाओं के नाम पर मात्र ठेंगा दिखाया है। जहां गंभीर मरीजों को रैफर करने के लिए 104 या 108 की सुविधा नहीं है। जरूरत पडऩे पर 108 को कैंचिया से बुलाया जाता है। जो करीब 30 किलोमीटर का सफर तय कर सीएचसी पर पहुंचती है। ऐसे में गंभीर मरीजों के जान को खतरा बना रहता है। इसका ताजा उदाहरण 5 अक्टूबर को देखने को मिला। जिसमें अस्पताल के सामने एक बाईक व जीप में टक्कर हो गई। बाईक सवार बुरी तरह घायल हो गया। जिसकी हालत गंभीर होने के कारण स्टॉफ द्वारा श्रींगगानगर रैफर किया गया। परंतु जब तक 108 पहुंचती तब तक युवक अपनी जान गवा चुका था। इससे पूर्व भी इसी तरह का एक हादसा हुआ जिसमें एक पंजाब के युवक को अपनी जान गवानी पड़ी।
मोर्चरी रूम बनाना भूला विभाग
राज्य सरकार ने 5 करोड़ की बड़ी राशि से अस्पताल का निर्माण तो करवा दिया परंतु अस्पताल में मोर्चरी रूम बनाना भूल गई। ऐसे में डॉक्टर्स को पोस्टमार्टम करने के लिए करीब 20 किलोमीटर दूर घमूडवाली पीएचसी में जाना पड़ता है। वहीं रिड़मलसर में पुलिस चौकी भी मौजूद है। ऐसे में पुलिस को शव का पोस्टमार्टन करवाने के लिए कड़ी मशत कर घमूड़वाली पीएचसी पर जाना पड़ता है। जबकि 30 बैड का अस्पताल व 7 डॉक्टर के पद होने के बावजूद भी मोर्चरी रूम नहीं बनाया गया।
नहीं है जरनेटर की सुविधा, अघोषित बिजली कट के दौरान मरीज हो रहे परेशान
सीएचसी में जरनेटर की व्यवस्था नहीं होने के कारण अघोषित विद्युत कटौति के समय मरीजों व चिकित्सा टीम को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। विद्युत कटौति के समय राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही चिरंजीवी योजना भी ठप्प हो जाती है। वहीं रात के समय इमरजेंसी में कभी कभार चिकित्सा स्टॉफ को टार्च की रोशनी में मरीजों का ईलाज करना पड़ता है। वहीं टीकाकरण के लिए रखे गए टीके भी गर्मी में खराब होने का आंदेशा बना रहता है।
Published on:
20 Oct 2022 06:43 pm
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