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सपना था टीचर बनना, बेरोजगारी ऐसी कि साथिन बनने की मजबूरी

-साथिन पदों के लिए उच्च शिक्षित महिलाएं भी कतार में -हो रहा है आवेदनों की छंटनी का कार्य

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श्रीगंगानगर.

प्रदेश में सुराज का नारा देने वाली सरकार भले ही कागजों में दावा करें कि सरकार ने हजारों लोगों को नौकरी दी, लेकिन हकीकत जुदा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों मे साथिन के पदों पर बीएड शिक्षित महिलाएं आवेदन करने में पीछे नहीं रही हैं।पूरे प्रदेश में इस पद के लिए जो आवेदन आएं हैं उनमें सामने आया है कि साथिन जैसे छोटे पद को पाने के लिए भी उच्च शिक्षित महिलाएं भी कतार में हैं। जिला मुख्यालय पर ऐसे आवेदनों की अब छंटनी का कार्य चल रहा है। इसमें अधिकांश आवेदक बीएड, एसटीसी, बीपीएड, एमए, एमएससी, एलएलबी शिक्षितों के हैं। महज 24 सौ रुपए मासिक मानदेय मिलने वाले इस साथिन के पद के लिए विभाग ने दसवीं कक्षा उतीर्ण योग्यता मांगी थी, लेकिन मेरिट के आधार पर बनने वाली इस सूची की जानकारी पाकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने आवेदनों का अम्बार लगा दिया।


इन क्षेत्रों में सबसे अधिक आवेदन
आवेदनों की जांच में पता चला है कि सबसे ज्यादा आवेदन अनूपगढ़, घड़साना और सूरतगढ़ ग्रामीण क्षेत्र से महिलाओं ने किए है। विभाग ने ऐसे आवेदनों की सूची बनाई है। अधिकारियों की मानें तो साथिन पद के लिए चौबीस सौ रुपए मासिक का मानदेय निर्धारित है। साथिन का कार्य इलाके में आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को लाने के लिए प्रेरित करना, गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए चिकित्सालय में पहुंचाना और उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराने की मदद करना है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच भी संबंधित स्वास्थ्य केन्द्र या चिकित्सालय में लेकर जाना शामिल है।


84 पद के लिए 150 से अधिक आवेदन
श्रीगंगानगर जिले में 84 पदों के लिए अब तक करीब डेढ़ सौ से अधिक आवेदन आ चुके है। घड़साना, अनूपगढ़, पदमपुर, रायसिहनगर, श्रीगंगानगर ग्रामीण, सादुलशहर, सूरतगढ़ और श्रीकरणपुर के कई गांवों के आंगनबाड़ी केन्द्रों में साथिन के पद रिक्त थे, इन्हें भरने के लिए ये आवेदन मांगे गए थे।


26 जनवरी को लगेगी अंतिम मुहर
साथिन बनने के लिए बीएड शिक्षित महिलाओं ने भी आवेदन करने में परहेज नहीं किया है। 26 जनवरी को ग्राम पंचायतों में होने वाली विशेष ग्राम सभाओं में पद के लिए चयन किया जाएगा। अलग-अलग शैक्षिक या अन्य गतिविधियों के लिए अंक निर्धारित किए गए हैं, इन अंकों के आधार पर ही मेरिट लिस्ट बनाई जाएगी।
-विजय कुमार, सहायक निदेशक महिला अधिकारिता, श्रीगंगानगर।

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