
श्रीगंगानगर. बाल विवाह की जकड़न ने कई जीवन को बर्बाद कर दिया है, पर कुछ महिलाओं ने इन कठिनाइयों को अवसर में बदलकर समाज के सामने एक मिसाल कायम की है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है श्रीगंगानगर के गणपतिनगर निवासी अन्नपूर्णा शर्मा की। बाल विवाह जैसी कुरीति का खिलाफ़ लड़ाई लड़ते हुए अन्नपूर्णा ने साबित किया कि शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है। आज वह अपने अनुभवों को साझा कर नई पीढ़ी को शिक्षित करने और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। अन्नपूर्णा शर्मा का जीवन शुरू से ही संघर्षमय रहा। महज आठवीं कक्षा तक पढ़ाई करने दौरान उनका विवाह कर दिया गया। ससुराल में जीवन आसान नहीं था। तीन बच्चों की मां बनने के बाद भी उनके साथ घरेलू हिंसा और असामान्य व्यवहार का सामना करना पड़ा। बाइस साल पहले उसे ससुराल से निकाला तो अपने तीन माह के बच्चे के साथ घर लौट आईं। उस समय परिस्थितियां कठिन थीं, पर उनके मन में एक दृढ़ संकल्प था कि वह अपने जीवन को नया दिशा देंगी। संकट की इस घड़ी में उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा। अपने आप को फिर से शिक्षित करने का बीड़ा उठाया। कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने आठवीं के बाद पढ़ाई जारी रखी और स्नाकोत्तर की डिग्री हासिल की। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें एक अच्छी नौकरी भी मिली। अपने बच्चों को शिक्षित करने की जिमेदारी उनके कंधों पर थी और उन्होंने अपने बच्चों को भी बेहतर शिक्षा दिलाने का लक्ष्य तय किया। अन्नपूर्णा ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने का कार्य भी किया। उन्होंने समाज में जागरूकता फैलाने के लिए कई कदम उठाए। अब वह महिला अधिकारिता विभाग में काउंसलर हैं और उनकी कहानी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। अपने बड़े बेटे को व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। छोटे बेटे को विदेश में उच्च शिक्षा के लिए भेजा और बेटी को बीएड कराकर शिक्षित बनाया। अन्नपूर्णा का मानना है कि शिक्षा और संकल्प से ही हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं और दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को तोड़ने के लिए समाज की जागरूकता और शिक्षा का प्रसार जरूरी है। अपनी जॉब के अलावा जरुरतमंद बच्चियों को शिक्षित करने और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष का दौर अब तक जारी है।
Published on:
13 May 2025 12:02 am
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