
कोरोना संक्रमण रोकने की दवा खरीद घोटाले के दोषी अनूपगढ़ बीडीओ को हटाया
श्रीगंगानगर. आखिरकार राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने अनूपगढ़ बीडीओ धीरज बाकौलिया को हटाने के आदेश किए है। इसके साथ साथ बीडीओ बाकौलिया को उसके मूल विभाग उच्च शिक्षा में भिजवाने और बीडीओ के स्थान पर वरियताक्रम के अनुसार वरिष्ठ को लगाने के आदेश दिए है।
कोरोना वायरस संक्रमण दवा की खरीद फरोख्त में नियम कायदों की अनदेखी कर बाजार मूल्य से कई गुणा दाम पर सीधी खरीद करने के मामले में राज्य के पंचायतराज विभाग ने यह कदम उठाया है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका के 24 अप्रेल के अंक में प्रकाशित समाचार ‘कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने वाली दवा की खरीद में गड़बड़ी’ के माध्यम से सोडियम हाइपो क्लारोइट खरीद में मनमर्जी करने का विस्तृत ब्यौरा दिया था। इस समाचार प्रकाशित के बाद जिला प्रशासन में खलबली मच गई थी। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के उपायुक्त गौरव चतुर्वेदी की ओर से आदेश जारी किया गया है।
इसमें अनूपगढ़ पंचायत समिति के विकास अधिकारी धीरज बाकोलिया की विकास अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर ली गई सेवाएं समाप्त कर उनके मूल विभाग उच्च शिक्षा के पद का कार्यभार करने के लिए उच्च शिक्ष्ज्ञा के मुख्यालय में प्रस्तुत करें।
अन्यथा राजदेशों की अवहेलना मानी जाएगी। इससे पहले हालांकि जिला परिषद के सीईओ महावीर सिंह और जिला कलक्टर शिव प्रसाद मदन नकाते ने अलग अलग स्तर पर जांच कराने के आदेश भी किए थे। कलक्टर की ओर से एसडीएम की जांच में बीडीओ को दोषी माना गया था, वहीं जिला परिषद की ओर से जांच रिपोर्ट को फाइनल करने के दौरान इसलिए रोक दिया गया कि एक ही प्रकरण की दो स्तर पर की जांच नहीं हो सकती।
सीईओ ने बीडीओ के मूल स्थान पर वापस भिजवाने के संबंध में पंचायतराज विभाग को फीडबैक दिया था। कॉलेज व्याख्याता से प्रतिनियुक्ति पर बना था बीडीओ जिला परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार अनूपगढ़ बीडीओ बाकोलिया मूल रूप से सुजानगढ़ का रहने वाला है। वह चुरू के राममनोहर लोहिया कॉलेज में सहायक आचार्य पद पर कार्यरत था लेकिन प्रतिनियुक्ति से वह पंचायतराज विभाग में आ गया और झुंझुनूं में बीडीओ बन गया।
इसके बाद उसे उदयपुर जिले से वह यहां अनूपगढ़ 25 फरवरी 2019 को बीडीओ का पद भार ग्रहण किया था। परिषद अधिकारियों की माने तो सरकार में एक ऐसी व्यवस्था है कि शिक्षा विभाग या उच्च शिक्षा से पंचायतराज विभाग में कई कार्मिक या अधिकारी प्रतिनियुक्ति के तौर पर लगाए जाते है।
इस बीच अनूपगढ़ बीडीओ को हटाने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने भी राजनीतिक सियासत तेज कर दी थी। एक ओर जहां यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत चुघ ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष आत्माराम तरड़ ने संबंधित बीडीओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर राजकोष को हुई हानि की वसूलने किए जाने की मांग मुख्यमंत्री और कलक्टर से की थी। भाजपा जिलाध्यक्ष ने तो यहां तक आरोप लगा दिया कि इस बीडीओ को खुली छूट देने वाले उच्चाधिकारियों के खिलाफ भी जांच की जाएं।
एक ओर पूरे देश में कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर हडक़ंप मचा हुआ है तो दूसरी ओर ऐसे अफसर भी है जिन्होंने इस महामारी की आड़ में दवाईयों की खरीद में निर्धारित कीमत से कई गुणा कीमतें चुकाने के लिए दरियादिली दिखा दी है।
जिले में कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए सोडियम हाइपो क्लोराइट दवा की खरीद फरोख्त में जमकर गड़बड़ी हुई, जैसे जैसे दवा आपूर्ति करने वाली फर्मो को भुगतान किया जा रहा है तो इसकी परतें खुलने लगी है। अनूपगढ़ पंचायत समिति ने तो करीब ढाई हजार लीटर दवा के दाम 110 रुपए में खरीद कर सबको चौंका दिया। जबकि श्रीगंगानगर पंचायत समिति ने तो 18 रुपए 45 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से दवाईयों की खेप मंगवाई।
इधर, बीडीओ की ओर से किए गए घोटाले पर जिला प्रशासन का कहना था कि कोरोना वायरस संक्रमण के दौर में प्रत्येक पंचायत समिति के विकास अधिकारियों से वीडियो कॉफ्रसिंग कर दवा की खरीद कर बचाव के प्रचार प्रसार करने की हिदायत दी गई थी।
इसी वीडियो कॉफ्रसिंग में दवा कितने लीटर खरीदनी है और उसका छिडक़ाव करना है या नहीं, इस बारे में कोई आदेश नहीं दिया था। लेकिन विकास अधिकारियों ने आनन फानन में यह दवा खरीदने के लिए जुगात कर ली।
Published on:
15 May 2020 10:41 pm
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