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श्री गंगानगर

दूसरों के शरीर में जिंदा रहेंगे असीजा के अंग, मेडिकल कॉलेज को सौंपा शरीर

Asija's organs will remain alive in others body, body handed over to medical college- हनुमानगढ़ सीइओ और बीडीओ असीजा बंधुओं ने दिया समाज में नया संदेश

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श्रीगंगानगर। हनुमानगढ जिला परिषद के सीईओ अशोक असीजा व पंचायत समिति के बीडीओ यशपाल असीजा के पिता 85 वर्षीय जुगल किशोर असीजा की मृत्यु के बाद उनका शरीर रिसर्च व अंगदान के लिए गुरुवार को मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया। राष्ट्रीय रक्त-नेत्र-शरीरदान संघ के अध्यक्ष निर्मल जैन ने बताया कि पर्यावरणप्रेमी जुगलकिशोर आसीजा की अंतिम इच्छा को पूरा करते जवाहरनगर सैक्टर एक िस्थत अपने घर पर राष्ट्रीय रक्त-नेत्र-शरीरदान संघ को उनका पार्थिव शरीर सौंपा।

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इसके तत्पश्चात् इस संगठन ने देहदान की समस्त प्रक्रिया पूर्ण करके सम्मानपूर्वक मेडिकल कॉलेज को देहदानी का शरीर सौंपा गया। जैन के अनुसार परिजनों ने मेडिकल कॉलेज को शरीर सौंपकर समाज के लिए अनुकरणीय मिसाल पेश की है। सचिव सीए विजय अरोड़ा ने बताया कि इससे स्व. जुगलकिशोर आसीजा के अंग दूसरों के शरीर में जिंदा रहेंगे तथा अनेकों लोगों को नया जीवन मिलेगा। वहीं, मेडिकल कॉलेज में रिसर्च के लिए मेडिकल विद्यार्थियों को भी काफी सहायता मिलेगी। असीजा ने जीवनकाल में लगभग दो से अधिक फलदार पेड़ लगाए गए हैं तथा जीते-जी मृत्युपरांत देहदान का संकल्प लिया गया था।

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जिला मुख्यालय पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में स्व. जुगलकिशोर आसीजा का शरीर सौंपने की प्रक्रिया के दौरान प्रिंसीपल डा.बीएल चोपड़ा, डा. पवन सैनी, चिकित्सकों, स्टाफ एवं मेडिकल विद्यार्थियों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कार्य बताया। इस दौरान असीजा परिवार और रिश्तेदार भी मौके पर मौजूद रहे।

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राष्ट्रीय रक्त-नेत्र-शरीरदान संघ के अध्यक्ष जैन ने बताया कि जिला मुख्यालय पर सरकारी मेडिकल कॉलेज बनने के बाद असीजा की पहला शरीर हैं जो चिकित्सा शिक्षा में अध्ययनरत एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं के लिए काम आएगा। इससे पहले संगठन की ओर से 18 देहदान किए जा चुके हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=58iLIx_LHmc

इसमें डा.दीपक मोंगा के पिता और अन्य लोगों के शरीर मेडिकल कॉलेज के लिए दिए गए थे। उन्हेांने बताया कि विदेशो में चिकित्सा की पढ़ाई के लिए चार-पांच स्टूडेंट्स को एक डैडबॉडी पढ़ाई के लिए मिलती है जबकि हमारे देश में 30 से 35 स्टूंडेंट पर एक बॉडी सीखने को मिलती है।