
श्रीगंगानगर. इलाके में आवारा श्वानों की समस्या लगातार बढ़ रही है। हर साल पन्द्रह से सत्रह हजार औसतन लोग डॉग्स बाइट के शिकार हो रहे है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी हॉस्पीटल में उपचार कराने वाले लोगों का आंकड़ा जारी किया है। जबकि प्राइवेट हॉस्पीटल में उपचार कराने वाले लोगों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। आवारा श्वानों की नसबंदी पर कानूनी अड़चन होने के कारण जिला प्रशासन और नगर परिषद प्रशासन ने नसबंदी योजना की फाइल को खोलना उचित नहीं समझा। वहीं आवारा श्वानों की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नसबंदी के बड़े-बड़े दावों के बावजूद शहर की हर गली मोहल्ले में श्वानों के स्थायी ठिकाने बनते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि कई इलाकों में एक ही स्थान पर 15 से 20 श्वानों का झुंड देखा जा सकता है, जिससे आमजन में भय का माहौल है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में इस मुद्दे पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि आवारा श्वानों को नियंत्रित करना नगर परिषद की जिम्मेदारी है। बावजूद इसके जमीनी स्तर पर हालात नियंत्रण में नजर नहीं आ रहे।
रात को घर से निकले तो हो जाओगे घायल
इलाके के कई रिहायशी क्षेत्रों, कॉलोनियों और बाजारों में अब आवारा श्वानों के झुंड के रूप में नजर आ रहे है, रात के समय यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब राहगीरों और दोपहिया चालकों पर श्वानों के झुंड के हमले की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह-शाम बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। कई बार श्वान के आपस में झगड़ने से भी दहशत फैलती है। इधर, नगर परिषद प्रशासन ने श्वानशाला फिर से संचालित करने का दावा किया था लेकिन अब तक यह धरातल पर नहीं उतर पाया है।
रैबीज से मौत हुई तो खोली श्वानशाला
चार साल पहले जिला मुख्यालय पर सेतिया कॉलोनी निवासी एक चौकीदार दूलाराम के आवारा श्वान के काटने से रैबीज हो गया था। उसकी उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। यह चौकीदार मूल रूप से नेपाल का रहने वाला था। उसकी मौत के बाद पार्षदों के धरना -प्रदर्शन किया तो नगर परिषद सभापति करुणा चांडक के प्रयासों से मृतक के परिजनों को आर्थिक मदद दी गई। इस घटना की पुनवृत्ति नहीं हो, इसके लिए आनन फानन में सख्त निर्णय लेकर नगर परिषद प्रशासन ने मिर्जेवाला रोड पर बनी नंदीशाला को खाली करवाकर वहां श्वानशाला खोल दी। नगर परिषद प्रशासन ने आवारा श्वानों की नसबंदी के लिए जयपुर की फर्म संतुलन जीव कल्याण को एक अप्रेल 2022 को ठेका दिया गया। इस पर करीब 48 लाख रुपए के बजट तय किया। नगर परिषद के रेकार्ड के अनुसार इस एनजीओ ने अब तक 3064 श्वानों की नसबंदी की है। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
दो बीघा भूमि मिल जाएं तो सिरे चढ़ जाएगी योजना
नगर परिषद आयुक्त रवीन्द्र सिंह यादव का कहना है कि श्वानों की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए प्रयास किए जा रहे है। दो बीघा भूमि मिल जाएं तो नसबंदी कराने की योजना को फाइनल कर दिया जाएगा। इसके लिए कई जगह भूमि का अवलोकन किया है। भूमि मिलने के बाद पशुपालन विभाग के सहयोग से आवारा श्वानों को पकड़कर नसबंदी कराने का प्रस्ताव बनाया गया है।
Published on:
06 Feb 2026 11:56 pm
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