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राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की मांग को लेकर नंगे पैर जनसम्पर्क

शहर के अम्बेडकर चौक पर स्थानीय लोगों ने किया स्वागत

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राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की मांग को लेकर नंगे पैर जनसम्पर्क

अनूपगढ़. पैदल चलते राजस्थानी परिषद के पदाधिकारी।

अनूपगढ़. राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने की मांग को लेकर राजस्थानी मोटियार परिषद की तरफ से निकाली जा रही यात्रा के अम्बेडकऱ चौक पर पहंचने पर स्वागत किया गया। इस यात्रा में राजस्थानी मोटियार परिषद् के तीन सदस्य नंगे पैर चलकर केंद्र और राजस्थान सरकार से राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की मांग कर रहे हैं। यात्रा में सुदेश राजस्थानी, राजुनाथ, मदन चारण, यात्रा संयोजक रामावतार शर्मा राजस्थानी मोटियार परिषद के बैनर तले नंगे पैर यात्रा कर रहे हैं। अंबेडकर चौक पर समाजसेवी सोनू सेतिया और नारायण तिवारी, कृपा शंकर सहित अन्य लोगों की तरफ से इनका स्वागत किया गया। सुदेश राजस्थानी ने बताया कि शहर या गांव में पहुंचने पर लोगों से सम्पर्क के दौरान चप्प्ल जूते आदि उतार कर स्कूल, बाजार आदि स्थानों पर जाकर लोगों को अपने यात्रा के उद्देश्यों के बारे में बताते हुए अभियान में साथ देने की अपील करते हैं। उन्होंने बताया कि 11 जनवरी को यह यात्रा बीकानेर से शुरू की गई थी जो 30 जनवरी तक चलेगी। इसी मांग को लेकर बीकानेर कलक्ट्रेट के समक्ष धरना भी लगाया जाता रहा है। यात्रा के दौरान डॉ. हरिराम बिश्नोई, प्रशांत जैन, शीशपाल ङ्क्षलबा, अमिताभ धालीवाल, हुकमा राम,महेंद्र राव, रामकार रोवन जोगो,रवि स्वामी सहित अन्य मौजूद रहे। बीकानेर से रवाना हुई यात्रा का उदासर, जामसर, खारा, चानमवाली, लूणकरणसर, महाजन व अर्जुनसर,सूरतगढ़ सहित रास्ते में अन्य स्थानों से होते हुए शहर में पहुंची हैं। यात्रा के दौरान प्रत्येक शहर एवं इसके आस पास के गांवों में हस्ताक्षर अभियान चलाकर सरकार से राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की मांग की जा रही है। एक लाख लोगों के हस्ताक्षर करवाने का लक्ष्य लेकर शुरु की गई हैं। यात्रा में नंगे पांव चलने वाले सुदेश राजस्थानी ने बताया कि राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं प्राप्त होना आम आदमी की पीड़ा है। राजस्थानी भाषा लागू होने से राजस्थान के लाखों बेरोजगारों की रोजगार संबंधी समस्या का समाधान हो सकेगा तथा राज्य की संस्कृति जीवित रहेगी। मोट््यार परिसद के संभाग अध्यक्ष डॉ. हरिराम बिश्नोई ने बताया कि राजस्थान के आम आदमी व साहित्यकार को इस आंदोलन में शामिल होना पड़ेगा। जिस दिन प्रदेश का हर व्यक्ति इसके महत्व को समझ जाएगा उस दिन सरकार को मान्यता देने पर मजबूर होना पड़ेगा।