श्रीगंगानगर. अब तो किसी संस्थान का नंबर गूगल पर सर्च कर कॉल करना भी भारी पड़ सकता है। ठगों ने गूगल पर भी सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले संस्थानों के नाम जोडकऱ अपने नंबर लिख रखे हैं, जिससे लोगों को अपने जाल में फंसाकर ठगा जा सके। ऐसा ही श्रीगंगानगर एक व्यक्ति के साथ हुआ है। जिसने जयपुर के बड़े निजी अस्पताल के नंबर सर्च किए और उस पर कॉल किया। रजिस्ट्रेशन के लिए वहां से एक लिंक भेजा गया। जिस पर क्लिक करते ही खाते से 99 हजार रुपए निकल गए।
पुलिस ने बताया कि एक बी छोटी निवासी सुभाष कुमार पुत्र श्रवण कुमार साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है कि 23 मई को उसने पुत्री के इलाज के लिए दुर्लभ जी अस्पताल जयपुर के नंबर सर्च किए। जहां एक नंबर मिला। उस पर नंबर पर बात करने के बाद दूसरी तरफ से उसको मोबाइल नंबर पर बात करने को कहा। उसने मोबाइल पर कॉल किया। जिससे डॉक्टर के संबंध में बात की। उधर से कहा कि डॉक्टर से मिलने को टोकन कटवाना पड़ेगा। अपाईटमेंट लेना होगा। इसके लिए दस रुपए का भुगतान करना होगा।
एक लिंक भेज रहे हैं, जिस पर भुगतान कर देना। दूसरी तरफ से मैसेज आया, जिसमें उसकी पुत्री का नाम, अपाईंटमेंट डेट, समय अंकित था। वहीं भुगतान के लिए एक लिंक आया। लिंक पर क्लिक करके दस रुपए का भुगतान किया लेकिन भुगतान नहीं हुआ। दूसरी तरफ से कहा गया कि अपाईंटमेंट हो गया है, भुगतान बाद में कर देना। 24 मई को वह पुत्री को जयपुर के लिए लेकर ट्रेन से रवाना हुआ। रास्ते में साढ़े आठ बजे उसके खाते से 97 हजार रुपए निकल गए। इसके बाद 2 हजार रुपए निकले। कुल 99 हजार रुपए की राशि निकल गई। इसके बाद खाते को ब्लॉक कराया। वह अस्पताल गया, तो पता चला कि वहां कई अपाईंटमेंट नहीं थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच इंस्पेक्टर रामप्रताप वर्मा को सौंपी है।
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सावधानी पूर्वक सर्च करें नंबर
– साइबर सीओ संजय बोथरा का कहना है कि गूगल पर भी फ्रॉड करने वालों की ओर से फर्जी साइट बनाकर डाली हुई होती है। जिसमें नंबर भी फर्जी होते हैं। इसके लिए गूगल पर अतिरिक्त पैसे खर्च करके ऐसी साइट को सबसे ऊपर दिखाते हैं। ऐसे में सर्च करने वाला सबसे ऊपर की साइट पर क्लिक कर देता है।
वहां से नंबर आदि लेकर कॉल करता है। फ्रॉड करने वाले इसी इंतजार में रहते हैं और लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। ऐसे में सर्च करते समय टोल नंबर या अन्य फोन तथा मोबाइल नंबर को सावधानी बरतें। पहले संतुष्टि कर लें की यह साइट सही है या नहीं। इसके बाद उसके नंबर, मेल आईडी आदि को यूज करें। अन्यथा गलत नंबर पर कॉल करने या मेल पर मैसेज भेजने के बाद आपके साथ फ्रॉड हो सकता है।
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अब तक थाने में हुए 7 मामले दर्ज
– पुलिस ने बताया कि साइबर थाना खुलने के बाद अब तक सात प्रकरण दर्ज हुए है। इन सात प्रकरणों को निस्तारण के लिए भी पुलिसकर्मियों को काफी भाग -दौड़ करनी पड़ रही है। इन फ्रॉड के प्रकरणों में पुलिस पहले यह पता लगाती है कि राशि यहां से निकलकर किस खाते में गई है। इसके बाद इस्तेमाल मोबाइल को ट्रेस करके आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकतर आरोपी झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ सहित कुछ मेवात इलाके के ट्रेस होते हैं। यहां जाकर आरोपियों को पकडकऱ लाना मुश्किल कार्य है। ऐसे में पुलिस लगातार प्रयास करती रहती है।
साइबर थाने में आई शिकायतें
– पुलिस कंट्रोल रूम के ऊपर भवन में करीब ढ़ाई माह पहले 14 फरवरी 2023 से साइबर थाना शुरू हुआ है। इस दौरान 250 शिकायतें प्राप्त हुई है। जिसमें 1.93 करोड़ की राशि का फ्रॉड हुआ है। पुलिस की साइबर टीम की ओर से 20.17 लाख रुपए की राशि होल्ड कराई गई है। वहीं 10.66 लाख रुपए की राशि रिफंड कराई गई है। अन्य प्रकरणों में भी पुलिस राशि रिफंड कराने के लिए प्रयास कर रही है।