
श्रीगंगानगर.
करीब आठ साल पहले सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट के ठेकेदार के बिल पास कराने के एवज में पन्द्रह हजार रुपए रिश्वत लेने के जुर्म में अदालत ने एक एक्सईएन को दो साल कठोर कारावास व बीस हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है। यह निर्णय विशिष्ट न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण प्रकरण) ने सुनाया।
अपर लोक अभियोजक पवन जोशी ने बताया कि सूरतगढ़ के वार्ड 19 निवासी महेन्द्र प्रताप पुरोहित पुत्र भंवरलाल पुरोहित ने 10 सितम्बर 2009 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत की थी। इसमें बताया कि उसकी फर्म मैसर्स बीआर कंस्ट्रक्शन के नाम से है। अपनी फर्म के नाम से उसने सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट में निर्माण कार्य किए थे। इन कार्यों का बकाया बिल दो लाख 70 हजार रुपए की राशि लेने के लिए जब उसने प्लांट के अधिशासी अभियंता सिविल विनोद माथुर पुत्र धीमालाल से संपर्क किया तो उसने 70 हजार रुपए रिश्वत मांगी। आखिर में सौदा 50 हजार रुपए में तय हुआ।
इसमें पच्चीस हजार एडवांस देने थे। एडवांस में 25 हजार के बजाय पन्द्रह हजार रुपए की बात कहकर उसने एसीबी के साथ ट्रैप की प्रक्रिया अपनाई। एसीबी टीम महेन्द्र प्रताप के साथ 12 सितम्बर 2009 को सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट के कार्यालय पहुंची। वहां जैसे ही एक्सईएन माथुर ने यह राशि ली तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। एक्सईएन जोधपुर स्थित चौपासनी हाउसिंग बोर्ड का रहने वाला है। एसीबी ने माथुर के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया। अदालत ने इस आरेापित को दोषी मानते हुए दो साल कठोर कारावास व बीस हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया।
अपर लोक अभियोजक पवन जोशी ने बताया कि सूरतगढ़ के वार्ड 19 निवासी महेन्द्र प्रताप पुरोहित पुत्र भंवरलाल पुरोहित ने 10 सितम्बर 2009 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत की थी। इसमें बताया कि उसकी फर्म मैसर्स बीआर कंस्ट्रक्शन के नाम से है। अपनी फर्म के नाम से उसने सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट में निर्माण कार्य किए थे।
Published on:
22 Dec 2017 07:44 am
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