श्रीगंगानगर. शहर के ह्रदय स्थल कहे जाने वाले सुखाडिय़ा सर्किल भारत माता चौक बदहाल है। इस चौक की रेलिंग दो सप्ताह पहले एक वाहन चालक ने तोड़ दी थी, इसे दुरुस्त कराने के लिए नगर परिषद प्रशासन ने अब तक कोई प्रयास नहीं किए है। इस चौक पर भारत माता के जयघोष लगाने वालों ने भी कोई कदम नहीं उठाया है। भारत माता की प्रतिमा पर जमी धूल, जंग लगे फव्वारा यंत्र और गंदगी के ढेर शहर के सौन्दर्यीकरण की हकीकत खुद बयां कर रही है। सार संभाल के लिए माली तक की नियुक्ति नहीं होने से हरियाली तक उजड़ चुकी है। इस चौक पर भारत-पाकिस्तान के बीच हुए 1971 युद्ध में भारतीय सेना की वीरता का प्रतीक पेटागन टैंक का फाउण्डेशन धंसने लगा है। यही स्थिति एक सौ फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज की है। दो माह पहले इस ध्वज का कपड़ा बदलने की तर्क देते हुए उतरवा लिया था, लेकिन वापस लगाने के लिए जिम्मेदार अफसर भूल चुके है। अब वहां सिर्फ पोल दिखाई दे रहा है। इस चौक पर दो फव्वारे सिस्टम भी लगे हुए है, लेकिन दोनों ही खराब पड़े है। इन फव्वारों के लिए पानी कनैक्शन इस चौक की बजाय आसपास रेहड़ी वालों के लिए ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है।
जिला प्रशासन और नगर परिषद की अनदेखी से टैंक का फाउंडेशन कभी भी गिर सकता है। साठ टन वजनी वाले इस टैंक को तत्कालीन जिला कलक्टर पीसी किशन के आदेश पर जिला परिषद की चारदीवारी से निकालकर सुखाडिय़ा सर्किल भारत माता चौक पर स्थापित कराया था लेकिन देशभक्ति की दुहाई देने वाले जिम्मेदार इस चौक की बिगड़ी तस्वीर को संवारने के लिए कभी प्रयास नहीं किए
नगर परिषद प्रशासन ने अम्बेडकर चौक के जीर्णोद्धार करने के लिए लाखों रुपए का बजट खर्च किया। कोटा स्टोन का पत्थर लगाकर इसे भव्य रूप दिया। वहीं अब बीरबल चौक को भव्य रूप देने के लिए इस चौक को तोड़कर नए सिरे से निर्माण किया जा रहा है। जबकि भारत माता चौक की अनदेखी का सिलसिला अब तक जारी है। यह चौक विभिन्न मांगों या हादसों या घटनाओं पर अफसोस जताने या विरोध प्रदर्शन का स्थल बनकर रह गया है। लेकिन इस चौक के सौन्दर्यीकरण करने के लिए जिला प्रशासन तक मूकदर्शक बन हुआ है।
जिला प्रशासन ने शहर के सौन्दर्यीकरण की हर माह होने वाली बैठकों में चर्चा जरूर की लेकिन स्थिति में बदलाव नहीं किया। इस टैंक स्थल को आमजन से दूर रखा है। इस टैंक पर चढक़र या पास जाकर सेल्फी करने का सीधा और सरल रास्ता तक नहीं बनाया। हालांकि भारतीय सेना ने इस टैंक पर आकर रंग रोगन जरूर कराया था लेकिन नगर परिषद प्रशासन ने इसकी नियमित साफ सफाई पर ध्यान नहीं दिया। टैंक का फाउण्डेशन उखड़ चुका है। इस कारण टैंक अपने स्थान से करीब पांच इंच नीचे तक होने लगा है। यही सिलसिला जारी रहा तो यह फाउण्डेशन कभी भी धराशायी हो सकता है। टैंक स्थल के नीचे पीपली उगने लगी है। जर्जर अवस्था देख अब लोग पास जाने से कतराने लगे है।
उनके जाते ही लग गया विरामइस टैँक को तत्कालीन जिला कलक्टर पीसी किशन के प्रयासों से जिला परिषद की चारदीवारी से निकालकर शहर के ह्रदय स्थल भारत माता चौक पर स्थापित करवाया था। आनन फानन में नगर परिषद की टीम ने इस टैँक को जिला परिषद से भारत माता चौक पर लाने के लिए तब छह जेसीबी मशीनों और चार क्रेनों का इस्तेमाल किया था। हाथों हाथ चबूतरा भी बनाया गया ताकि इस पर टैँक को स्थापित किया जा सके। लेकिन गुणवत्ताहीन निर्माण से फाउण्डेशन जर्जर होने लगा है। तत्कालीन कलक्टर ने इस पेटागन टैँक के चारों ओर शिला पटिटका बनवाकर उस पर भारत पाक युद्ध में भारतीय सेना की वीरता की गाथा का लेख छपवाना चाहते थे लेकिन उनके तबादले के बाद यह प्रस्ताव कागजों तक सीमित रह गया।
इस टैँक को जिला प्रशासन को सौंपने के दौरान बकायदा पत्थर की शिलापट्टिका बनवाई गई थी। भारत-पाक युद्ध 1971 में विजित पाकिस्तानी टैँक को तत्कालीन मुख्यमंत्री बरकतुल्ला खां को श्रीगंगानगर शहर के लिए लेफ्टीनेन्ट जनरल टी.एन. रैना द्वारा समर्पित किया गया। इसमें तिथि 10 जुलाई 1972 अंकित किया गया। यह शिला पट्टिका जिला परिषद परिसर के कबाड़ में रखी गई। इस टैंक को शिफ्ट किया गया, तब भी यह पट्टिका नहीं लगाई।