
रायसिंहनगर।
भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रात्रि 2.30 बजे हुए तेज हवाई धमाकों की आवाज़ से हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि सरहद पर दो बार धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं जिसके बाद लोग घरों से बाहर निकल आए। सूचना मिलने के बाद सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी रायसिंहनगर बॉर्डर पहुंचे और हालातों का जायज़ा लिया।
बीएसएफ ने भी की धमाकों की पुष्टि
बीएसएफ ने भी धमाको की पुष्टि की है। वही ग्रामीणों के अनुसार रात करीब ढाई बजे वायुयान की तेज गरजना सुनी गई। इसके तुरंत बाद बेहद तेज धमाके हुए, धमाकों के बाद इलाके में दहशत फैल गई।
लोग अनहोनी की आशंका के चलते बच्चों सहित घरों से बाहर आ गए। अनूपगढ के सीमा सुरक्षा बल की चौकी कैलाश से महज़ 1600 मीटर की दूरी पर स्थित चक-32 ए के ग्रामीणों ने सीमा पर दो जबरदस्त धमाकों की सूचना दी।
फायरिंग से भी दहशत
इससे पहले भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल की हिन्दुमलकोट सीमा चौकी के ठीक सामने शनिवार को पाक क्षेत्र में फायरिंग से हडक़म्प मच गया। पुलवामा की घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के चलते हुई इस घटना का पता चलते ही बीएसएफ, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सीमा पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। बीएसएफ ने इसे पाकिस्तानी शिकारियों की हरकत बताया है और इस पर पाक रेंजर्स के अधिकारियों को प्रोटेस्ट नोट देने की बात कही है। जिला कलक्टर ने आंतरिक सुरक्षा की आपात बैठक बुला कर घटना की समीक्षा की है।
ये इसलिए मची दहशत
घटना के प्रत्यक्षदर्शी गांव हिन्दुमलकोट के किसान हरदेवसिंह उर्फ जोगासिंह ने बताया कि वह एक अन्य किसान के साथ सुबह दस बजे बीएसएफ की चौकी से पर्ची लेकर तारबंदी के पार अपने खेत में सिंचाई और अन्य कार्यों के लिए गया था। सुरक्षा की दृष्टि से बीएसएफ के दो जवान भी उनके साथ थे।
किसान ने बताया कि खेत में चने की फसल के निरीक्षण के दौरान पाकिस्तानी क्षेत्र में बॉर्डर पिल्लर नंबर 278 के पास एक गाड़ी आई और जीरो लाइन के पास रुक गई। इसी दौरान गाड़ी में सवार एक व्यक्ति ने फायर किया तो वह लोग सिंचाई के लिए बने नाले में लेट गए। फायर करने के बाद गाड़ी और उसमें सवार लोग वहां से चले गए। इस किसान का कहना है कि फायर उन्हें निशाना बनाकर किया गया था, लेकिन घटनास्थल का निरीक्षण करने वाले बीएसएफ, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने इससे इनकार किया है।
अधिकारी सकते में
बॉर्डर पर फायरिंग की सूचना जैसे ही जिला मुख्यालय पर पहुंची अधिकारी सकते में आ गए। श्रीगंगानगर सेक्टर में बीएसएफ के उप महानिरीक्षक और अन्य अधिकारी तुरंत घटनास्थल की ओर रवाना हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और बीएसएफ के अधिकारियों से जानकारी ली।
बीएसएफ के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि फायर करने वाले पाकिस्तानी शिकारी थे। वह लोग शिकार के लिए अपने खेतों में आए थे। दोनों देशों के बीच तनाव के चलते बॉर्डर क्षेत्र में आकर शिकार करने पर सवाल उठाने पर बीएसएफ के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस संबंध में पाक रेंजर्स को आपत्ति दर्ज करवा रहे हैं।
आंतरिक सुरक्षा की बैठक
इस घटना को लेकर कलक्ट्रेट के सभागार में जिला कलक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते की अध्यक्षता में आंतरिक सुरक्षा की बैठक हुई जिसमें सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने घटना की समीक्षा की। बीएसएफ को इस घटना को लेकर पाक रेंजर्स को कड़ा प्रोटेस्ट नोट देने का कहा गया है।
भारत-पाक के बीच तनाव के चलते शिकारियों को सीमा क्षेत्र में आकर शिकार करने की छूट देने पर सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने हैरानी जताई है। उनका कहना है कि शिकारियों की ओर से की गई फायरिंग के जवाब में किसानों के साथ गए बीएसएफ के जवान अपनी एसाल्ट राइफलों का मुंह खोल देते तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह बड़ी घटना बन जाती। बैठक में सभी एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।
संवेदनशील है श्रीगंगानगर बॉर्डर
श्रीगंगानगर जिले से सटी 210 किलोमीटर लम्बी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा काफी संवेदनशील है। पंजाब में आतंकवाद के दौरान इस बॉर्डर से आतंकवादियों की घुसपैठ और पाकिस्तान से हथियारों की खेप आने की घटनाएं सामने आने के बाद केन्द्र सरकार ने सीमा पर तारबंदी करवाने का निर्णय किया। तारबंदी के बाद भी घुसपैठ का खतरा कम नहीं हुआ है। बीएसएफ ने घुसपैठ के कई प्रयास विफल किए हैं। पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलने के बाद वहां का ड्रग माफिया भी श्रीगंगानगर जिले से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर डिलीवरी प्वाइंट तलाश रहा है। पाकिस्तानी तस्करों की ओर से तारबंदी के ऊपर से भारतीय क्षेत्र में हेरोइन के पैकेट फैंके जाने के कई मामले बीएसएफ की पकड़ में आए हैं।
तारबंदी के पार भी होती है खेती
राष्ट्रविरोधी तत्वों की घुसपैठ रोकने के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार जीरो लाइन से डेढ़ सौ मीटर इधर अपने क्षेत्र में तारबंदी करनी पड़ी। श्रीगंगानगर जिले में तारबंदी का काम हुआ तो सीमा क्षेत्र के किसानों की कृषि भूमि का कुछ हिस्सा तारबंदी के उस पार रह गया। उस भूमि पर कृषि कार्य के लिए किसानों को बीएसएफ की पोस्ट से अनुमति लेकर जाना पड़ता है। तनाव की स्थिति में बीएसएफ के जवान भी किसानों के साथ जाते हैं। किसान चाहते हैं कि तारबंदी के पार उनकी जमीन भारत सरकार ले ले और उसकी एवज में जमीन या उचित मुआवजा उन्हें दे दे तो अनुमति आदि के झंझट से मुक्ति मिल जाए। किसानों की यह मांग कई बार संसद में भी उठी है। लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ।
Published on:
24 Feb 2019 09:30 am

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