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श्रीगंगानगर में मिनी सचिवालय निर्माण पर लगी ब्रेक

brake on construction of mini secretariat in sriganganagar- एक ही छत के नीचे कलक्ट्रेट, कोर्ट सहित 28 ऑफिस संचालित की थी योजना.

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श्रीगंगानगर में मिनी सचिवालय निर्माण पर लगी ब्रेक

श्रीगंगानगर में मिनी सचिवालय निर्माण पर लगी ब्रेक

श्रीगंगानगर. जिला मुख्यालय पर सरकारी ऑफिस अलग-अलग बिखरे हुए हैं। दूर दराज से काम आने वाले लोगों को बहुत भटकना पड़ता है। इस कारण एक ही छत के नीचे सभी ऑफिस संचालित करने के लिए पुरानी शुगर मिल की 130 बीघा भूमि पर मिनी सचिवालय बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया।

सिविल लाइन से कलेक्ट्रेट, जिला परिषद, सीएमएचओ, कृषि विभाग, एसपी, एएसपी, सीओ सिटी, ग्रामीण और एससी-एसटी ऑफिस, पीडब्ल्यूडी, तहसील ऑफिस भी मिनी सचिवालय में ही संचालित करने की योजना पर तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने मुहर लगाई थी।

खाली हो रही जगह पर पार्किग विकसित करने की योजना बनी। इससे गोल बाजार में वाहन पार्किंग की वर्षो से बनी समस्या का हल हो सकता था। लेकिन गहलोत सरकार आते ही बजट के कमी के कारण मिनी सचिवालय निर्माण पर एकाएक ब्रेक लग गई। राज्य सरकार ने बजट नहीं दिया इस कारण प्रदेश का पहला सात मंजिला मिनी सचिवालय बनाने की योजना अटकी हुई है।

इस भव्य भवन को बनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने राजस्थान राज्य रोड डिवेलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन को दी। पीडब्ल्यूडी और टाउन प्लानर की ओर से इस भवन का ले आउट प्लान तैयार कर राज्य सरकार से स्वीकृत करवा लिया है।

31 जुलाई 2020 को मिनी सचिवालय भवन बनकर तैयार करने की तिथि तय की गई थी। मिनी सचिवालय के पास तीस बीघा भूमि नगर विकास न्यास को बेचान के लिए अधिकृत किया गया था।

इस भूमि पर भूखंड बेचने के लिए यूआइटी ने प्रचार प्रसार पर करीब साढ़े तेरह लाख रुपए का बजट खर्च कर दिया। लेकिन अब तक एक भी भूखंड नहीं बिका है। पुरानी शुगर मिल की 130 बीघा भूमि पर मिनी सचिवालय के अलावा 28 विभागो के ऑफिस बनने का प्रोजेक्ट था।

यूआईटी ने तीस बीघा भूमि बेचने के लिए अलग अलग प्लाट बनाए थे। इसके लिए बकायदा प्रचार प्रसार भी किया गया। इस पर बजट भी खर्चा लेकिन ग्राहकों ने दिलचस्पी नहीं ली।

नोडल एजेंसी राजस्थान राज्य रोड डिवेलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने जीएसटी भवन के लिए निर्माण शुरू किया। इस भवन की लागत 32 करोड़ रुपए आंकी गई। लेकिन बजट महज १४ करोड़ रुपए का ही मिल पाया।

बजट नहीं होने के कारण यह निर्माण थम गया है। प्रोजेक्ट मैनेजर भीमसेन स्वामी ने बताया कि मिनी सचिवालय भवन के लिए अभी तक सिर्फ डिवाइजन ही तैयार हो पाया है। जब तक बजट नहीं होगा तब तक इसका निर्माण नहीं हो सकता।

बजट जुटाने के लिए यूआईटी को तीस बीघा भूमि आवंटित की लेकिन इसमें से एक भी प्लाट नहीं बिका है। मिनी सचिवालय भवन का निर्माण पिछले साल पूरा होना चािहए था लेकिन बजट की कमी बताकर जिला प्रशासन के साथ साथ अधिकृत विभागों के अधिकारियों ने एक दूसरे को अधिकृत बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

इस भवन के निर्माण होने से कलक्ट्रेट सहित अधिकांश सरकारी विभाग एक ही छत के नीचे संचालित हो सकते थे। लेकिन धरातल पर इसके लिए प्रयास शुरू नहीं हुए। हालांकि तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे इस मिनी सचिवालय का निर्माण का शिलान्यास जरूर किया था।

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