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श्रीगंगानगर में फिर से पीतल और तांबे के बर्तनों का क्रेज

Brass and copper utensils craze again in Sri Ganganagar- आकर्षक और नए डिजाइनों से बर्तनों का सालाना कारोबार एक सौ करोड़ पार.

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श्रीगंगानगर में फिर से पीतल और तांबे के बर्तनों का क्रेज

श्रीगंगानगर में फिर से पीतल और तांबे के बर्तनों का क्रेज

श्रीगंगानगर. चार दशक बाद फिर से इलाके में पीतल और तांबे के बर्तनों के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है। कोरोनाकाल के बाद पीतल और तांबे के बर्तनों का एकाएक इस्तेमाल अधिक होने लगा है। कई ग्राहकों का स्टील और एल्मुनियम के बर्तनों का मोहभंग हो चुका है, इसके विकल्प में पीतल के बर्तनों ने अपनी जगह बनाई है।

वहीं पीतल और तांबे के बर्तनों में आकर्षक और नए डिजाइनों ने ग्राहकी की रौनक आई है। पूरे जिले में बर्तनों की करीब पांच सौ से अधिक दुकानें है। वहीं फेरीवाले गांव गांव ढाणी ढाणी बर्तन बेच रहे है।

कोरोना काल में बेरोजगार हुए युवाओं ने अब गली मोहल्लों में बर्तनों की दुकानें खोल ली है। हालांकि इलाके में बर्तनों की फैक्ट्रियां नहीं है। लेकिन स्टील के बर्तन ज्यादातर मुम्बई, चेन्नई, जगाधरी, अहमदाबाद से आपूर्ति हो रही है। वहीं एल्मुनियम के बर्तन मुक्तसर और दिल्ली से आते है। इसके साथ साथ पीतल के बर्तन जगाधरी और अमृतसर की फैक्ट्रियां से मंगवाए जा रहे हे।

यहां बर्तनों को बेचने की हौड़ सी लग गई है। जिला मुख्यालय पर बर्तनों की सबसे पुरानी दुकान भारत पाक विभाजन के बाद धवन परिवार ने शुरू की थी। पाकिस्तान के लायलपुर इलाके से आए इन हिन्दु विस्थापितों ने इलाके में अपनी पहचान बना ली।

अब इस परिवारिक सदस्यों के अलावा अन्य लोगों ने भी बर्तनों का कारोबार कर लिया। इस कारोबार से करीब बीस हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

बर्तनों के पुराने व्यवसायी सतीश कुमार धवन का कहना है कि चार दशक पहले पीतल के बर्तनों का क्रेज था लेकिन स्टील ने आकर पीतल को भूला दिया। अलग अलग बर्तनों का अपने अपने गुण है। लेकिन बीमारियां जैसे जैसे बढ़ती देख लोगों ने अपनी रसोई से बर्तनों को बदलना भी शुरू कर दिया है।

पीतल और तांबे का फिर चलन बढऩे लगा है। ये बर्तन सेहत के लिए ठीक भी है। चपाती पर घी लगाने के लिए बर्तन घिलौड़ी का निर्माण सिर्फ बीकानेर में होता है।

पीतल की इस घिलौड़ी का निर्माण पूरे देश में कहीं नहीं होता। इस वजह से यह बर्तन रसोईघरों में अब अधिक दिखने लगा है।

इधर, दुकानदार रवि जैन का कहना है कि बर्तनों में भी सोने चांदी की तरह निवेश किया जा सकता है। पीतल के बर्तन कभी कबाड़ नहीं होते।

पुराने या टूटने या क्षतिग्रस्त होने पर पीतल के बर्तन की कीमत खरीद की गई राशि से दुगुनी मिल सकती है। हर प्रकार के बर्तनों की नई नई वैरायटियां ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। बर्तनों की बिक्री का दूसरा पहलू यह गिफ्ट आइटम भी है।

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