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बिना स्वीकृति खरीद डाली

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chair in park

बिना स्वीकृति खरीद डाली

श्रीेगंगानगर.

सौर ऊर्जा में हुए घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद अब ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह लगी रंग-बिरंगी सुंदर कुर्सियों की खरीद को लेकर कई ग्राम पंचायतें सवालों के घेरे में आ गई हंै। आरोप है कि कुर्सियों की खरीद का यह खेल जिला मुख्यालय से ही खेला जा रहा है। जिलेभर में अब तक लाखों की लागत वाली दो हजार से अधिक कुर्सियों की खरीद दर्जनों ग्राम पंचायतें कर चुकी हैं। उधर ग्राम पंचायतों ने इसकी न तो स्वीकृति जारी करवाई तथा न ही टेंडर किए गए।

कुर्सियों का बेचान करने वाली फर्म ही ग्राम पंचायतों को अपनी जानकारी वाली तीन फर्मों का कॉटेशन देकर कुर्सियों की सप्लाई भी कर दी। कई जगहों पर तो सरपंचों को ही बाद में पता चला कि ग्राम पंचायत में कुर्सियों की सप्लाई हो गई है। हर ग्राम पंचायत में 20 से 100 तक कुर्सियों की सप्लाई की गई है। हैरत की बात है कि इन कुर्सियों की कीमत हर ग्राम पंचायत में जाकर बदल गई। ग्राम पंचायतों द्वारा अपनी-अपनी मर्जी से कुर्सियों का भुगतान प्रति कुर्सी 6 से 15 हजार रुपए तक किया गया है। जबकि कुर्सी की वास्तविक कीमत केवल ढाई से तीन हजार रुपए प्र्रति कुर्सी है।


जेम पोर्टल पर दर्ज नहीं, बिना स्वीकृति हो गई खरीद
ग्राम पंचायतों में सप्लाई की गई इन सीमेंटेड कुर्सियों का विवरण जेम पोर्टल पर नहीं है। जेम पोर्टल पर सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद की जाने वाली प्रत्येक वस्तु व उसकी कीमत दर्ज है। इससे बाहर जाकर कोई भी सरकारी एजेंसी खरीद नहंीं कर सकती। कुर्सियों का विवरण ना तो जेम पोर्टल पर दर्ज है तथा ना ही बीएसआर दरों में इसका निर्धारण किया गया है। इसके अलावा कुर्सियों की खरीद के लिए किसी प्रकार की प्रशासनिक, वित्तीय अथवा तकनीकी स्वीकृति जारी नहीं की गई है। बिना स्वीकृति जारी किए पंचायतों में करीब दो से 5 लाख रुपए तक कुर्सियों की खरीद कर ली गई।


शिकायत ने खोली पोल
ग्राम पंचायतों में खेले जा रहे कुर्सियों की खरीद के खेल की पोल राज्यस्तर पर हुई एक शिकायत में खुलकर सामने आई है। परिवादी के अनुसार पंचायत समितियों से प्राप्त किए गए तकमीना रजिस्टर के अनुसार कुर्सियों को लेकर कोई तकमीना तैयार नहंीं किया गया तथा ना ही कोई प्रशासनिक अथवा वित्तीय स्वीकृति जारी की गई। आरोप है कि स्वीकृतियों के झंझट से बचने के लिए ग्राम पंचायतों ने आपूर्तिकर्ता फर्म को टुकड़ों में भुगतान किया है। इस संबंध में राज्य स्तर पर हुई एक शिकायत से कुर्सियों की खरीद का बड़ा खेल खेलने वाली ग्राम पंचायतों की पोल खुल गई।

इन ग्राम पंचायतों ने खरीदी कुर्सियां
शिकायत के अनुसार जिले की पदमपुर, सूरतगढ़, अनूपगढ़, घडसाना, श्रीविजयनगर, श्रीकरणपुर, रायसिंहनगर, सादुलशहर, श्रीगंगानगर पंचायत समितियों में इन कुर्सियों की खरीद का खेल चल रहा है।

336 ग्राम पंचायतों में से सवा सौ ग्राम पंचायतों में ऐसी कुर्सियों की आपूर्ति होने का दावा शिकायतकर्ता की ओर से किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत जालौकी, बैंरा, श्रीबिजयनगर पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत 8 एसएचपीडी, रायसिंहनगर पंचायत समिति क्षेत्र ग्राम पंचायत सरदारपुरा बीका, 22 पीएस, 66 आरबी, 71 आरबी, लूणेवाला, कीकरवाली, ठाकरी, सादुलशहर पंचायत समिति क्षेत्र ग्राम पंचायत करड़वाला, श्रीगंगानगर पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत 21 जीजी बुर्जवाली, चूनावढ़, ततारसर, 5 जी सहारणावाली आदि शामिल है।


कुर्सियों को बिना स्वीकृति या जैम पोर्टल या बीआरसी दरों के निर्धारण से पहले खरीदने के मामले में संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारियों से इस संबंध में फीडबैक लिया जाएगा। इस खरीद फरोख्त में कोई अनियमितता है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
चिन्मयी गोपाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद श्रीगंगानगर।

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