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यहां 38 साल बाद दूसरी बार होगा उप चुनाव

By-election will be held here for the second time after 38 years-विधानसभा चुनाव 2023: करणपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी कुन्नर का निधन
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यहां 38 साल बाद दूसरी बार होगा उप चुनाव

यहां 38 साल बाद दूसरी बार होगा उप चुनाव

Assembly elections 2023: श्रीगंगानगर जिले की करणपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार गुरमीत सिंह कुन्नर के निधन से उप चुनाव की िस्थति बन गई है। इससे पूर्व 1985 के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद निर्दलीय गुरदीप सिंह का निधन होने पर उप चुनाव करवाने पड़े थे। लगभग 38 साल बाद इस विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर इतिहास दोहराया जाएगा। कुन्नर के निधन से चुनाव स्थगित हो गया है। चुनाव आयोग अब छह माह के भीतर इस विधानसभा क्षेत्र में उप चुनाव करवाएगा।
वर्ष 1985 के विधानसभा चुनाव में गुरदीप सिंह कांग्रेस टिकट के दावेदार थे लेकिन टिकट मिली जगतार सिंह कंग को। इससे पूर्व 1967 के विधानसभा चुनाव में गुरदीप सिंह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीते थे। टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान ही ब्रेम हेमरेज होने पर उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। अस्पताल से ही उनके नाम से एक अपील जारी की गई, जिसमें बीमारी की वजह से जनता के बीच नहीं आ पाने की मजबूरी बताते हुए वोट देने की अपील की गई। चुनाव परिणाम घोषित हुआ तो गुरदीप सिंह अच्छे खासे मतों से विजयी हुए। चुनाव परिणाम घोषित होने के हफ्ते भर बाद अस्पताल में ही गुरदीप सिंह का निधन हो गया।
उनके निधन के बाद करणपुर विधानसभा सीट के लिए उप चुनाव की घोषणा हुई तो कांग्रेस की टिकट इकबाल कौर को मिली। विरोधी धड़े ने उनके सामने कुंदनलाल मिगलानी को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारा। संयोग से मिगलानी का चुनाव निशान भी वही था जो गुरदीप सिंह का था। उप चुनाव में इकबाल कौर को 27 हजार तथा कुंदनलाल मिगलानी को 17 हजार मत मिले। इस प्रकार दस हजार मतों के अंतर से इकबाल कौर विजयी रही।
यह भी संयोग: एक ही नाम राशि
संयोग देखिए कि गुरदीप सिंह और गुरमीत सिंह कुन्नर की नाम राशि एक ही थी। स्वभाव भी दोनों का एक जैसा था। गुुुुुुुुरदीप सिंह का निधन परिणाम आने के बाद हुआ, जबकि कुन्नर मतदान से पहले ही अनंत की यात्रा के पथिक बन गए। कुन्नर का स्वास्थ्य पिछले तीन-चार साल से सही नहीं था। ब्लड शुगर का असर गुर्दों पर होने के कारण उन्होंने सिंगापुर में भी उपचार लिया। खराब स्वास्थ्य के चलते इस बार खुद चुनाव लड़ने की बजाय वह अपने बेटे रूबी कुन्नर को चुनाव लड़ाने के इच्छुक थे लेकिन पार्टी ने टिकट उन्हींं को दे दिया।

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