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मिल सकती है कैंसर पीडि़तों को दर्द से निजात दिलाने की इजाजत

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श्रीगंगानगर.

राजकीय चिकित्सालय स्थित कैंसर केयर यूनिट को जल्द ही कैंसर पीडितों को दर्द से निजात दिलाने की इजाजत मिलने की उम्मीद है। इसके चलते यहां आखिरी स्टेज वाले मरीजों को दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए मॉरफिन के इंजेक्शन लगाए जाएंगे। सेवा मामले में कैंसर केयर यूनिट को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला है, जबकि प्रथम स्थान पर बूंदी रहा है। चिकित्सा कर्मियों ने बताया कि 7 से 14 जुलाई तक सीफू व महावीर कैंसर हॉस्पिटल में प्रदेशभर के कैंसर केयर यूनिट के डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें चिकित्सा मंत्री व चिकित्सा सचिव सहित अन्य चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रत्येक जिले में स्थापित कैंसर केयर यूनिटों के प्रदर्शन का आंकलन किया गया, जिसमें बंूदी की यूनिट प्रथम व श्रीगंगानगर की यूनिट दूसरे स्थान पर रही।


राजकीय चिकित्सालय की कैंसर केयर यूनिट प्रभारी डॉ.प्रमोद चौधरी, नर्सिंगकर्मी सुनील व रजनीश जयपुर में आयोजित विशेष प्रशिक्षण में शामिल हुए। बेहतर प्रदर्शन करने वाली कैंसर केयर यूनिटों को जल्द ही पेलेटिव केयर यूनिट में बढ़ाया जाएगा। जिसका लाभ श्रीगंगानगर को भी मिलने की उम्मीद है। इस यूनिट में कैंसर की आखिरी स्टेज पर चल रहे मरीजों को जब कहीं इलाज नहीं मिलता है तो उन्हें घर भेज दिया जाता है।

ऐसे मरीजों को असहनीय दर्द से छुटकारा पाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है लेकिन यदि यहां यह यूनिट शुरू हो जाती है तो ऐसे मरीजों को जिला चिकित्सालय की कैंसर केयर यूनिट में ही दर्द से छुटकारा मिल सकेगा। इसके लिए विभाग की ओर से ऐसे मरीजों को दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए मॉरफिन के इंजेक्शन लगाने के लिए आदेश जल्द ही मिलने की उम्मीद है। कैंसर केयर यूनिट के प्रभारी डॉ. प्रमोद चौधरी ने बताया कि यदि पेलेटिव केयर यूनिट की इजाजत मिलती है तो यहां आसपास के मरीजों को काफी फायदा होगा और उनको बीकानेर या जयपुर नहीं जाना पड़ेगा।

यूनिट में एसी ना कूलर
कैंसर केयर यूनिट पहले ओपीडी के समीप एक छोटे कमरे में चल रहा था लेकिन बाद में कीमोथैरेपी के लिए बेडों की आवश्यकता हुई। इस पर यूनिट को इमरजेंसी में एक कमरा दे दिया गया। यहां ना तो कोई खिड़की, रोशनदान है। ना ही इसमें कोई कूलर व एसी की व्यवस्था की गई है। इसके चलते यहां डॉक्टर, नर्सिंगकर्मी, मरीज व उनके परिजनों का रुकना दूभर हो जाता है। इसके चलते मरीजों को पास ही एक वार्ड में भर्ती कर कीमोथैरपी दी जाती है। यदि यहां पेलेटिव केयर यूनिट खुलती है तो जगह की और जरूरत पड़ेगी।