श्रीगंगानगर। राइट टू हेल्थ बिल को वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलनरत प्राइवेट चिकित्सकों पर लाठीचार्ज पर चिकित्सक समुदाय लामबंद हो गया है। जयपुर में चिकित्सकों पर हुए लाठी चार्ज के विरोध में सोमवार शाम को भारत माता चौक पर कैंडल मार्च निकाला गया। वहीं सरकारी चिकित्सकों ने भी दो घंटे ओपीडी का बहिष्कार करने की घोषणा की। इधर, रेजीडेंट डॉक्टरों ने भी बेमियादी हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया। इधर, चिकित्सकों के इस कैंडल मार्च के दौरान पुलिस की अकारण लाठी चार्ज का विरोध करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। चिकित्सकों का कहना था कि चिकित्सक समुदाय अपना विरोध जताने के िए शांतिपूर्वक मार्च निकाल रहे थे लेकिन जिस तरीके से लाठीचार्ज किया गया, यह चिकित्सक समुदाय को भयभीत करने वाला कदम हैं।
आईएमए के पूर्व जिलाध्यक्ष डा. बृजमोहन सहारण का कहना था कि पूरे प्रदेश में सभी निजी हस्पताल बंद हैं और जनता परेशान है लेकिन राज्य सरकार ने जिस तरह 19 नए ज़िले बना कर रेवड़ियां बांटी,उसी तरह जनता को गुमराह करने के लिए एक ऐसा बिल लाने पर अड़ी है। इससे निजी चिकित्सा व्यवस्था चरमरा जाएगी। अब चिकित्सकों पर लाठीचार्ज करवा रही हैं। सरकार राजकीय चिकित्सालयों में आपात काल सेवा का ढांचा सुधारने की बजाय अपने गले की घंटी निकाल रही है। निर्दोष डाक्टरों पर हिंसा करने वालों पर एक्शन हो।इस प्रदर्शन के दौरान आईएमए के पदाधिकारी डा. दीपक चौधरी, डा. अजय मिश्रा, डा. पीयूष राजवंशी, डा. राजेश शर्मा, डा. रूप सिडाना, डा. रवीन्द्र गोदारा आदि मौजूद थे।
इसके उपरांत चिकित्सकों ने वृंदावन विहार िस्थत विधायक राजकुमार गौड़ के आवास पर जाकर प्रदर्शन किया। वहां विधायकके बेटे विशाल गौड़ को पुलिस लाठी चार्ज करने के मामले में सरकार के खिलाफ सवाल जवाब कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग का ज्ञापन दिया। मोबाइल फोन पर विधायक से बातचीत भी हुई और लाठीचार्ज पर अपना विरोध जताया।
इधर, अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ ने भी चिकित्सकों पर लाठीचार्ज के खिलाफ प्रदेश भर में मंगलवार को दो घंटे कामकाज करने की घोषणा की है। संघ जिलाध्यक्ष डा. पवन सैनी ने बताया कि सुबह नौ बजे से सुबह 11 बजे तक कार्य बहिष्कार किया जाएगा। सैनी का कहना था कि अपनी मांग पर प्रदर्शन करने के दौरान पुलिस की ओर से लाठीचार्ज की नौबत क्यों आई, इस संबंध में प्रदेश भर में मंगलवार को दो घंटे कामकाज का बहिष्कार चिकित्सक समुदाय का समर्थन करेंगे।
वहीं जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले के 78 निजी अस्पतालों पर तीसरे दिन सोमवार को ताले लगने से रोगियों को मायूसी हाथ लगी। निजी अस्पतालों में इमरजेंसी सुविधा ठप होने के कारण ज्यादातर रोगी वापस लौट गए। इधर, राजकीय जिला चिकित्सालय में रोगियों का तांता लगा रहा। वहीं इमरजेंसी में विशेष व्यवस्था रही।