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ढाई साल से पंजाबी भाषा अकादमी में चैयरमैन की कुर्सी खाली

Chairman's chair vacant in Punjabi language academy for two and a half years- श्रीगंगानगर में राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी ऑफिस पर जड़ा ताला.

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ढाई साल से पंजाबी भाषा अकादमी में चैयरमैन की कुर्सी खाली

ढाई साल से पंजाबी भाषा अकादमी में चैयरमैन की कुर्सी खाली

श्रीगंगानगर. पंजाबी बाहुल्य क्षेत्र में पंजाबी भाषा को प्रचार प्रसार करने के लिए राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी में अब सन्नाटा इतना अधिक रहता है कि वहां कोई भी व्यक्ति आता भी नहीं।

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के ढाई साल बीतने के बावजूद अब तक अकादमी में अध्यक्ष का मनोनयन नहीं हो पाया है। यह मनोनयन राज्य सरकार करती है।

लेकिन गहलोत सरकार ने अभी तक राजनीतिक नियुक्तियों का पिटारा नहीं खोला है, इस कारण अकादमी अध्यक्ष की कुर्सी खाली है। चैयरमैन के बिना यहां लिपिकीय स्टाफ भी नहीं मिल रहा है।

मात्र सचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार २१ एच के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य श्यामलाल कुक्कड़ को दे रखा है। राज्य के कला एवं सांस्कृतिक विभाग जयपुर के शासन सचिव इस अकादमी की मॉनीटरिंग करते है। लेकिन पिछले डेढ़ साल से कोरोनाकाल के कारण वहां स्टाफ भी अपने तबादले करवाकर अन्य विभागें में चला गया है।

संविदा के तौर पर सेवानिवृत राज्य कर्मियों को लगाने की अनुशंषा भी हुई लेकिन एक के सिवाया कोई आया नहीं। अब पिछले दिनों संविदा पर रखे गए भगतराम गोयल का भी अनुबंध समाप्त हो चुका है।

जिला परिषद परिसर में इस अकादमी का ऑफिस भी कभी कभार खुलता है। जिला मुख्यालय पर राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी में अध्यक्ष रवि सेतिया उस समय रहे जब वसुंधरा सरकार का कार्यकाल महज छह माह का बचा था। 8 जून 2018 को सेतिया ने तत्कालीन जिला कलक्टर ज्ञानाराम के समक्ष पेश होकर अध्यक्ष के तौर पर अपनी ज्वाइनिंग की थी।

लेकिन 11 दिसम्बर 2018 को विधानसभा का परिणाम आया तो अकादमी अध्यक्ष का पद स्वत: ही खत्म हो गया। इस अकादमी के लिए अलग से कार्यालय नहीं था। एेसे में तत्कालीन सीएम से आदेश करवाकर तत्कालीन अध्यक्ष सेतिया ने जिला परिषद परिसर में यह कार्यालय खुलवाया था।

प्रदेश में राजनीति नियुक्तियों में यह अकादमी भी शामिल है। जनप्रतिनिधि भले ही इस अकादमी के अध्यक्ष को राज्यमंत्री का दर्जा देने का दावा करते हो लेकिन जिला प्रशासन के पास इस संबंध में कोई आदेश नहीं है।

यही कारण है कि इस पद को लेकर भी इलाके के जनप्रतिनिधियो में गहरी रूचि नहीं है। मौजूदा सरकार के समक्ष किसी भी कांग्रेसी का इस पद के लिए पैनल नहीं बन पाया है।

हालांकि कांग्रेसियों के अनुसार कांग्रेस के तत्कालीन जिलाध्यक्ष पृथीपाल सिंह संधू, गोपीराम नागपाल, महेन्द्र सिंह बराड़, परमजीत सिंह रंधावा आदि के नाम पिछले साल चर्चा में रहे लेकिन कोरोनाकाल के बाद किसी ने प्रयास नहीं किए।

कांग्रेसियों का कहना है कि राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सरकार अभी गंभीर नहीं है। इस बीच, पंजाबी भाषा अकादमी के सचिव श्यामलाल कुक्कड़ का कहना है कि पंजाबी भाषा के लिए किए जाने वाले कार्यक्रम कोरोना की वजह से ठप पड़े है।

हालांकि पिछले साल गुरुनानक जयंती पर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ जिले में कई कार्यक्रम भी हुए थे। अब कोरोना की दूसरी लहर के कारण कोई गतिविधियां संचालित नहीं हो रही है।

अध्यक्ष पद पर मनोनयन सरकार को करना है। अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद ही अकादमी की ओर से कार्यक्रम और अन्य गतिविधियां संचालित की जाएगी।

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