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बिहार व उत्तरप्रदेश से लाए जाते हैं बाल श्रमिक

-सात साल में 330 कराए मुक्त

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child labour

श्रीगंगानगर.

महिलाओं के हाथ की शोभा बढ़ाने वाले लाख के चूड़ों पर लगे नग मासूमों के खून, उन पर किए अत्याचारों से तैयार होते है। बिहार, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल से मजबूर और जरूरतमंद परिवारों से बच्चों को यहां लाया जाता है। जिन्हें नाममात्र का वेतन और बेहद खराब हालातों में रखा जाता है। श्रीगंगानगर में पुलिस सात साल में करीब 330 बाल श्रमिकों को चूड़ा फैक्ट्री और अन्य स्थानों से मुक्त करवा चुकी है लेकिन इसके बावजूद भी बच्चों से नग लगवाने का काम रूक नहीं पा रहा है।


मानव तस्करी विरोधी यूनिट के पुलिस अधिकारी व चाइल्ड लाइन जिला समन्वयक त्रिलोक वर्मा ने बताया कि दो दशक से यहां बच्चों को बिहार, उत्तरप्रदेश व पश्चिम बंगाल से लाकर चूड़ों पर नग लगाने का कार्य चल रहा है। इन पर बार-बार कार्रवाई होती है लेकिन इसके बावजूद बच्चों से यह काम कराने का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले छह-सात सालों में मुक्त कराए बच्चों से यही जानकारी मिली है कि उनको यहां लाकर बंधक बना लिया जाता है और बंद मकान में सालों तक उनसे चूड़ों पर नग लगवाए जाते हैं।


पिछले सात सालों में चाइल्ड लाइन व मानव तस्करी यूनिट की ओर से करीब 330 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जा चुका है। दो दिन पहले मुक्त कराए गए 23 बच्चे बिहार के गया, दरभंगा के रहने वाले हैं।


माता-पिता को दलाल देते हैं प्रलोभन
मुक्त कराए जाने वाले बच्चों से जानकारी मिली है कि चूड़ा फैक्ट्री चलाने वाले मालिक अपने दलालों के मार्फत इन बच्चों को बिहार, यूपी व पश्चिम बंगाल से यहां बुलाते हैं। पिछले तीन साल पहले तक पश्चिम बंगाल से बच्चे यहां आते थे लेकिन अब बिहार व यूपी से बच्चे लाए जाते हैं। दलाल वहां बच्चों के माता-पिता को रुपयों का प्रलोभन देकर व बच्चों को अच्छी तरह रखने की बात कहकर ले आते हैं। गरीब माता-पिता अपने बच्चों को इनके हवाले कर देते हैं।'


दी जाती है यातनाएं
बच्चों को फैक्ट्री में लाने के बाद दलाल तो गायब हो जाता है और फैक्ट्री चलाने वाले लोग बच्चों को तरह-तरह की यातनाएं देते हैं। उनको मकान में बंद रखा जाता है। फिलहाल मुक्त कराए गए बच्चे करीब 8 व 9 माह से एक मकान में बंद थे। यहां इनसे 18 से 20 घंटे तक काम कराया जाता है और ना अच्छा खाना दिया जाता है।


आंकड़ों में जानें
वर्ष बाल श्रमिक
2012 43
2013 54
2014 72
2015 56
2016 44
2017 32
2018 29 अब तक
कुल 330