
श्रीगंगानगर.कड़ाके की सर्दी, धुंध और ठिठुरन के बीच सोमवार को महाराजा गंगासिंह चौक पर किसानों का आक्रोश दिनभर तपता रहा। फिरोजपुर फीडर के पुनर्निर्माण के लिए पंजाब सरकार की ओर से 21 जनवरी से 35 दिन की नहरबंदी के निर्णय के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर जिलेभर से किसान जुटे और सुबह 11 बजे से देर शाम तक पड़ाव डालकर धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि रबी सीजन के बीच नहरबंदी लेना खेती के लिए मौत का फरमान साबित होगा।किसानों का आरोप है कि गेहूं, जौ, सरसों और चना जैसी प्रमुख रबी फसलें इस समय निर्णायक सिंचाई की मांग कर रही हैं, लेकिन जल संसाधन विभाग और प्रशासन की उदासीनता के चलते खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। किसानों ने 21 जनवरी के बजाय फरवरी में नहरबंदी लेने और खखा हैड पर 1500 क्यूसेक सिंचाई पानी की स्पष्ट व्यवस्था की मांग रखी। उनका कहना था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। कांग्रेस पार्टी के महापड़ाव से दूरी बनाए रखने पर किसान नेताओं ने नाराजगी भी जताई।
सुबह सर्दी के कारण किसान कुछ देरी से पहुंचे, लेकिन धूप निकलते ही चौक पर भीड़ बढ़ती गई। सभा में गंगनहर प्रोजेक्ट चेयरमैन हरविंद्र सिंह गिल, संयुक्त किसान मोर्चा प्रतिनिधि सुभाष सहगल, मनीराम पूनिया, रणजीत सिंह राजू, कालू थोरी सहित अनेक किसान नेता मौजूद रहे। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पानी नहीं मिला तो किसान सडक़ों पर उतरने को मजबूर होंगे।
शाम करीब साढ़े तीन बजे जिला कलक्टर मंजू सहित प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किसानों की वार्ता हुई। 17 जनवरी को पुन: समीक्षा बैठक का आश्वासन दिया गया, लेकिन किसान संतुष्ट नहीं हुए। नेताओं ने चेताया कि जवाब नहीं मिला तो 19 जनवरी को रजाइयों के साथ महापड़ाव होगा।
किसानों ने आरोप लगाया कि पुरानी बीकानेर कैनाल और ईस्टर्न कैनाल की सफाई शुरू नहीं हुई है। उनका कहना था कि मौजूदा हालात में 1500 क्यूसेक के बजाय केवल 700-800 क्यूसेक पानी मिलने की आशंका है। शाम चार बजे धरना समाप्त हुआ, लेकिन किसानों ने स्पष्ट किया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई।
Published on:
13 Jan 2026 01:25 pm
