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सरकारी नौकरी को छोड़ भजन गायिकी को चुना

श्रीगंगानगर आईं भजन गायिका रेशमी शर्मा से बातचीत

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सरकारी नौकरी को छोड़ भजन गायिकी को चुना

सरकारी नौकरी को छोड़ भजन गायिकी को चुना

श्रीगंगानगर. सालासर बालाजी एवं खाटूश्याम जी के भजन गाकर चर्चित हुई समस्तीपुर बिहार की रहने वाली भजन गायिका रेशमी शर्मा शनिवार को श्रीगंगानगर में थी। वो यहां श्री श्याम बाल संकीर्तन मंडल समिति की ओर से मनाए जा रहे श्याम महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित भजन संध्या के सिलसिले में आईं। अपने व्यस्त समय से कुछ समय निकाल कर रेशमी ने पत्रिका प्रतिनिधि से बात की।

Q.भजन गायिकी के प्रति रुझान कैसे हुआ? जवाब- पारिवारिक माहौल पूजा-पाठ वाला था, उसका असर पड़ा। सात साल की उम्र से ही गाने लगी। पहले पढ़ाई और गायकी साथ-साथ चली लेकिन दोनों में तालमेल बैठाना मुश्किल था। पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी भी लगी लेकिन दोनों काम साथ-साथ नहीं चल सकते थे, इस कारण नौकरी छोड़ दी और गायकी को चुना।

Q. आपको किस तरह के गीत-संगीत पंसद हैं? जवाब- दरअसल मैं जगरातों में तो भजन ही गाती हूं लेकिन अच्छा संगीत कोई भी हो सुनना अच्छा लगता है। गजल भी गुनगुना लेती हूं। मेरे भजनों में ज्यादातर श्याम बाबा- एवं बालाजी के भजन ज्यादा होते हैं।

Q. सोशल मीडिया पर आपकी अच्छी खासी फैन फालोइंग को लेकर कोई प्रतिक्रिया? जवाब- सोशल मीडिया तभी अच्छा है जब इसका सदुपयोग हो। वर्तमान में यह दवा कम जहर ज्यादा है। सोशल मीडिया से लोग भटकें नहीं बल्कि सकारात्मक चीजों की तरफ जाएं।

Q. आपको कोई सपना?जवाब- कोई विशेष सपना नहीं है। बस बेटा भी संगीत से जुड़े। भले ही गायक नहीं बने लेकिन में उसके दिल में म्यूजिक हो, यही सपना है।

Q. श्रीगंगानगर के श्याम भक्तों के लिए कोई संदेश? जवाब- जिस तरह श्याम बाबा को हारे का सहारा कहा गया है, उसी तरह भक्त भी किसी का सहारा बनें। किसी का गलत नहीं करना चाहिए। गलत बोलना एवं गलत सोचना भी नहीं चाहिए।