
श्रीगंगानगर.
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण 2017 का परिणमा जब जारी किया था तो इंदौर ने इस सर्वे में बाजी-मारी और इंदौर सर्वे में पहले स्थान पर रहा था। इंदौर शहर में साफ-सफाई के लिए क्या किया, कि वो पहले स्थान पर रहा और श्रीगंगानगर की नगर परिषद 359 वीं रैकिंग रही थी। इंदौर की यूं तुलना की श्रीगंगानगर नगर परिषद से यूं की गई है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 की रैकिंग के लिए गुरुवार को ही टीम आ चुकी है। स्वच्छता के लिए निधारित मापदंडों के अनुसार टीम के सदस्य पवन कुमार अैर मनोज कुमार ऑनलाइन कर रहे हैं।
पब्लिक से लिया फीड बैक
इस बीच टीम ने शुक्रवार को चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय के आस-पास के एरिया क्षेत्र में जाकर 20 से अधिक लोगों से सफाई व्यवस्था के बारे में विस्तृत फीड बैक लिया गया है। टीम सदस्यों का कहना है कि शहर में अलग-अलग 200 से 250 लोगों से फीड बैक लिया जाएगा। लोगों से पूछा गया कि शौचालय साफ है या नहीं? शहर की सडक़ों की सफाई कैसी है ? डस्टबिन लगे हुए हैं या नहीं? घर-घर कचरा का उठाव हो रहा है नहीं ? इन लोगों के मोबाइल नंबर और आयु आदि का पूरा विवरण लिया है और इनकी रिपोर्ट भी ऑनलाइन की जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस टीम की चैकिंग और शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए टीम और आएंगी।
दो करोड़ का बजट
नगर परिषद ने शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए दो करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई है। इसके बाजवूद शहर पूरीतरह ओडीएफ तक नहीं हुआ है। शहर के कुछ वार्डों में अभी तक लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं। हालांकि कागजों में एक वार्ड को छोडकऱ सभी वार्डों को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है।
जानिए हम सफाई में क्यूं पीछे रहे जाते हैं इंदौर
इस कारण है देश में नंबर वन
1. हाजिरगाहों पर भी बायोमेट्रिक मशीन लगी है। सभी सफाई कर्मियों की उपस्थिति बोयोमेट्रिक से होती है।
2. कचरे का सेग्रीगेशन होता है। गीला-सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र होता है। गले कचरे से खाद बनाई जाती है और सूखे से ईंधन के काम आने वाले ब्लॉक।
3. रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था कई सालों से हैं। व्यवसायिक एरिया अलग जोन में बांटकर मैकेनाइज्ड होती है।
4. इंदौर में 100 घरों में कचरा एकत्र होता है। यहां लंबे समय से डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन व्यवस्था है।
5. निजी स्तर पर जो लोग कचरा एकत्र करते थे उन्हें भी डोर टू डोर से जोड़ा, ताकि कोई भी घर नहीं छूटे।
6. शहर कचरा डिपो रहित है। यानि 100 प्रतिशत कचरा उठता है अन्यथा कंपनी पर भारी पेनल्टी लगती है।
7. कचरा परिवहन वाहन जीपीएस सिस्टम से कनेक्ट हैं,वाहन लोकेशन पर नहीं होने पर कार्रवाई होती है। 8-सभी मार्केट व मुख्य रोड पर हरे व नीले रंग के कचरा डिब्बे हैं ताकि लोग खुले में कचरा नहीं डालें।
9. रोड स्वीपिंग मैकेनाइज्ड हैं, यहां आधुनिक मशीनों वक्यूम क्लीनर से सडक़ साफ होती है।
श्रीगंगानगर 1 वार्डों की बात से बहुत दूर की है, यहां नगर परिषद में ही अभी तक बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू नहीं हो पाई है।
2. ठोक कचरा प्रबंधन के तहत ठोस कचरा निस्तारण प्लांट के लिए जमीन चिन्हित की गई,ग्रामीणों का विरोध नहीं लग पाया प्लांट।
3. रात्रिकालीन सफाई स्वच्छता सर्वेक्षण को देखते हुए कुछ दिन पहले ही शुरू की है, लेकिन ज्याद प्रभाव नहीं।
4. शहर के 50 में 34 वार्डों में कचरा उठाव परिषद करती है और 16 वार्डों में ठे्रकेदार करता है। पूरे शहर में घर-घर से कचरा का उठाव नहीं होता हालांकि कुछ वार्डों में हो रहा है।
5. शहर के 34 वार्डों में नगर परिषद कचरा संग्रहण करती है,अन्य वार्डों में एनजीओ से कचरा का उठाव करवाती है।
6. शहर मे विभिन्न स्थानों पर कचरा पात्र लगाए हैं। सफाई कर्मचारी उसी में कचरा डालते हैं वह भी नियमित साफ नहीं होता है।
7. नगर परिषद का दावा है कि जीपीएस सिस्टम से जोडऩे की कार्रवाई चल रही है और अभी तक जोड़ा ही नहीं गया है।
8. बाजार में नगर परिषद ने डस्टबिन अभी व्यापारियों को दिया है। इसके बावजूद व्यापारी दुकानबंद करने पर कचरा सडक़ पर डाल देते हैं।
9. सफाई के लिए शहर में वैक्यूम क्लीनर मशीन तो है लेकिन कभी-कभार चलाया जाता है। सीवरेज की शहर में अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है। सर्वेक्षण कर रही है टीम स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आई टीम को पूरा रिकॉर्ड दे दिया गया है और शनिवार को टीम कंपनी की बताई गई लॉकेशन के अनुसार सर्वेक्षण करेंगी।
शहर में गीला और सूखा कचरा को अलग-अलग अभी तक नहीं किया जा रहा है। एक साथ कचरा छह जैड में कचरा प्वांइट पर ही डाला जाता है। सुनीता चौधरी, आयुक्त, नगर परिषद श्रीगंगानगर।
Updated on:
06 Jan 2018 08:09 am
Published on:
06 Jan 2018 07:31 am
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