
budha johar
श्रीगंगानगर.
ऐतिहासिक गुरुद्वारा बुड्ढ़ा जोहड़ के पास जिले की एकमात्र झील के संरक्षण और उसके विकास की मांग राज्य सरकार से की गई है। संरक्षण के अभाव में यह झील अपना अस्तित्व खो रही है जबकि सिख पंथ की कई यादें इससे जुड़ी हुई हैं।
राजस्थान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष हरदीप सिंह डिबडिबा के नेतृत्व में सिखों का एक शिष्टमंडल गुरुवार को जिला कलक्टर से मिला और उन्हें मुख्यमंत्री के नाम झील के संरक्षण एवं विकास के संबंध में ज्ञापन सौंपा।
कार्यवाहक अध्यक्ष डिबडिबा ने बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन गहलोत सरकार ने बजट में झील के संरक्षण और विकास के लिए इसे धार्मिक ग्रामीण पर्यटक स्थल के रूप में मान्यता देकर डेढ़ करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। लेकिन इस योजना पर कोई काम नहीं हुआ और स्वीकृत की गई राशि लैप्स हो गई।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1734 में सिख पहली बार इस इलाके में आए थे तब यह झील 80 मुरब्बा में फैली हुई थी। इसमें बरसात का पानी जमा होता था। संरक्षण के अभाव में यह झील अब 18 बीघा भूमि पर सिमट कर रह गई है। सरकार ने अब भी ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में यह झील अस्तित्व खो देगी।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल
डिबडिबा का कहना है कि झील का उचित संरक्षण और विकास हो तो यह अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल का रूप ले सकती है। इस झील पर हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। इसके अलावा झील के आसपास बिश्नोई बहुल गांव होने के कारण सैकड़ों की संख्या में हरिण हैं जिनकी संख्या में झील के विस्तार के साथ वृद्धि होगी। ऐसा होने पर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी इस इलाके में आने लगेंगे। यहां बुड्ढ़ा जोहड़ गुरुद्वारे के साथ बिश्नोई समाज का भी धार्मिक स्थल है जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
झील के संरक्षण और विकास की योजना को पूर्ववर्ती सरकार ने मंजूरी दी थी। मौजूदा सरकार ने जो योजना मंजूर की है उस पर काम चल रहा है। झील के संरक्षण और विकास से संबंधित योजना की फाइल देखकर ही सरकार को अवगत करवाया जाएगा। जरूरत पडऩे पर मौका भी देखा जा सकता है।
- ज्ञानाराम, जिला कलक्टर
Published on:
12 Apr 2018 09:44 pm
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